पश्चिम बंगाल के चिटफंड घोटाले में अपना पैसा डूबने से परेशान होकर आत्महत्या करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
सोमवार को एक चिटफंड एजेंट द्वारा निवेशकों का पैसा लौटा पाने में विफल रहने पर तंग आकर उसके 60 वर्षीय पिता ने पंखे से लटकर कर जान दे दी। शारदा ग्रुप जैसे चिटफंड घोटाला मामले में अब तक आठ लोग यह आत्मघाती कदम उठा चुके हैं।
पुलिस के मुताबिक, उत्तरी 24 परगना जिले के ऋषि बंकिम कॉलोनी निवासी एनेक्स चिटफंड के एजेंट बिधान के पिता जगदीश रॉय ने अपने घर में फांसी लगा ली।
कुछ ही दिन पहले शारदा समूह में भारी निवेश करने वाले रंजीत प्रमाणिक ने जहर खाकर जान दे दी थी। वहीं ग्रुप में अपने 30 हजार रुपये लगाने वाली दक्षिणी 24 परगना जिले की 50 वर्षीय उर्मिला प्रमाणिक ने 20 अप्रैल को खुद को आग लगाकर जान दे दी थी।
ग्रुप के एक और एजेंट और पुरुलिया जिले के निवासी स्वप्न कुमार बिश्वास ने भी फांसी लगा ली थी, जिन्होंने खुद की बचत की चार लाख की कमाई कंपनी में लगा दी थी।
ग्रुप के ही दक्षिण 24 परगना जिले के तीन और एजेंटों ने आत्महत्या कर ली थी। हाल ही में इस कंपनी में अपने लगाए पैसे डूबने की स्थिति में एक होटल व्यवसायी ने भी खुदकुशी कर ली थी।
सरल ढंग से पेश हो कंपनियों का लेखा-जोखा
कोलकाता के शारदा ग्रुप द्वारा लोगों को सब्जबाग दिखाकर फर्जी ढंग से धन जमा करने का मामला सामने आने के बाद एकाउंटिंग क्षेत्र से जुड़ी संस्था इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एकाउंटिंग ने सुझाव दिया है कि कंपनियों से जुड़ी वित्तीय जानकारियों को ऐसे ढंग से पेश किया जाना चाहिए कि आम आदमी किसी भी कंपनी के आंकड़े व लेखा-जोखा देख कर उसकी वित्तीय हालत, कारोबारी स्थिति और कामकाज के बारे में समझ सके।
इसके लिए कंपनी के हर कारोबार से जुड़े वित्तीय विवरण को अलग से दर्शाना उपयोगी हो सकता है क्योंकि इससे लोगों को विभिन्न क्षेत्रों कंपनी की गतिविधियों और स्थिति की जानकारी अधिक स्पष्ट ढंग से हो सकती है।