रुपए के मजबूत होने की उम्मीदों को फिर तगड़ा झटका लगा है।
डॉलर के मुकाबले सोमवार को रुपया 110 पैसे लुढ़ककर 64 के स्तर को पार कर 64.30 पर बंद हुआ। बीते शुक्रवार को रुपया 135 पैसे मजबूत होकर 63.20 पर बंद हुआ था।
रुपए में 1.7 फीसदी की कमजोरी से एक बार फिर बाजार की उम्मीदें कमजोर हुई हैं। ऐसे में अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपया अभी कमजोर स्थिति में ही बना रहेगा।
उनके अनुसार सरकार को बढ़ते चालू खाता घाटा को जहां नियंत्रित करना होगा, वहीं निर्यात बढ़ाने के लिए कदम भी उठाने होंगे।
इससे पहले, वित्त मंत्री पी. चिदंबरम विदेशी निवेशकों का भारतीय अर्थव्यवस्था में भरोसा बढ़ाने के लिए शनिवार को मुंबई में विदेशी संस्थागत निवेशकों के साथ बैठक भी कर चुके हैं। हालांकि, इसका असर सोमवार को बाजार के सेंटीमेंट पर नहीं दिखा।
अर्थशास्त्री डीएचपाई पनंदिकर का कहना है कि डॉलर में उतार-चढ़ाव सितंबर में अमेरिकी फेड रिजर्व की पॉलिसी आने तक बना रहेगा। भारतीय रुपया ही नहीं दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाएं ब्राजील और इंडोनेशिया की मुद्रा में भी काफी गिरावट दर्ज की गई है।
फेड रिजर्व के राहत पैकेज पर लिए गए फैसले के बाद मुद्राओं में स्थायित्व आएगा। एंजल ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट वैभव अग्रवाल के अनुसार तत्कालीन परिस्थितियों के अलावा मूलभूत मुद्दों को समाधान बेहद जरूरी है।
चालू खाता घाटा को कम करने और निर्यात बढ़ाने के ठोस कदम सरकार को उठाने होंगे। इसके बाद ही रुपया एक स्थायी स्तर ले सकेगा। मौजूदा परिस्थितियों में इसके कमजोर होने की आशंका ज्यादा है।