एक तरफ जहां रुपए की कीमत गिरने के चलते कई सेक्टरों में निराशा छाई हुई है। तो वहीं कुछ सेक्टर ऐसे भी जहां रुपए के गिरने की खुशी मनाई जा रही है।
ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि इससे वहां के हालात सुधर सकते हैं। साथ ही इन क्षेत्रों में रोजगार के साथ-साथ नौकरियों के अवसरों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
इंटरनेशनल टूरिज्म
सैर-सपाटा करने वाले विदेशी सैलानियों के लिए भारत एक हॉट डेस्टिनेशन है। विदेशी लोगों के घूमने के शौक से इस समय देश में डॉलर के भंडार में बढ़ोतरी हो सकती है।
एक डॉलर की तुलना में रुपए की कीमत गिरने से विदेश से आने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी। दिल्ली टूर ऑपरेर्ट्स एसोसिएशन के सदस्य कमलजीत खन्ना के मुताबिक इस वर्ष जाड़े में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में 15-20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
विदेशों से जाड़े के सीजन में आने वालों की बुकिंग शुरू हो चुकी है। और अब तक के आंकड़ों के मुताबिक यह संख्या पहले के मुकाबले ज्यादा है।
हेल्थ टूरिज्म
विदेशों की तुलना में भारत में सस्ता और अच्छा इलाज होने के चलते विदेशों के लोग इलाज कराने की लिए भारत का रुख पहले ही कर चुके हैं।
डॉलर के रेट में बढ़ोतरी होने के चलते सस्ते और अच्छे इलाज के लिए विदेश से लोग भारत आएंगे।
राजधानी दिल्ली पहले ही हेल्थ टूरिज्म के क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रही है। ताजा हालात में अमेरिका, अफ्रीका और यूरोपियन देशों से इलाज कराने आने वाले लोगों की संख्या और बढ़ेगी।
हॉस्पिटेलिटी सेक्टर
पर्यटकों की संख्या बढ़ने से हॉस्पिटेलिटी सेक्टर में भी बूम आएगा। इस सेक्टर को आगामी सीजन से बहुत अधिक फायदा हो सकता है।
बड़ी संख्या में एनआरआई भी जाड़े के मौसम में भारत आ सकते हैं।
इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों के मुताबिक हॉस्पिटेलिटी सेक्टर ने इसके लिए तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। इस सेक्टर को आगामी सीजन से अगले एक और सीजन का बिजनेस मिलने की उम्मीद है। इस सेक्टर में नए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
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आईटी सेक्टर
डॉलर के मजबूत होने से आईटी सेक्टर इंडस्ट्री में अच्छा बूम आने की संभावना है। अगर रुपए की दशा इसी तरह बनी रही तो विदेशों से मिलने वाले वर्क्स कांट्रेक्ट में बढ़ोतरी हो सकती है।
इससे आईटी सेक्टर को काफी बड़ा फायदा हो सकता है। नए वर्क्स कांट्रेक्ट की वजह से नए लोगों की जरूरत होगी और इससे बड़ी संख्या में आईटी सेक्टर के युवाओं को फायदा हो सकता है।
रुपए में हुई गिरावट से पिछले दिनों इंफोसिस, एचसीएल जैसी कंपनियों को काफी फायदा हुआ है। पहले हुए कांट्रेट का भी अच्छा भुगतान मिलेगा।
बीपीओ सेक्टर
टेलीकॉम सेक्टर के अलावा हर सर्विस और प्रोडक्ट प्रोवाइडर कंपनी के बीपीओ में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला हुआ है। पहले ही हुए वर्क्स कांट्रेक्ट के आधार पर यहां की कंपनियों को अधिक रुपए का भुगतान मिलेगा।
इसके चलते बीपीओ सेक्टर में काम करने वाले लोगों की सैलरी में इजाफा हो सकता है। साथ ही कंपनियों की तरफ से डॉलर की कीमतों में उतार चढ़ाव को देखते हुए भविष्य के वर्क्स कांट्रेट तुरंत किए जा सकते हैं।