तेल आयातकों द्वारा डॉलर की लिवाली और शेयर बाजारों में गिरावट के चलते शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 52 पैसे टूटकर 59.77 के स्तर पर बंद हुआ।
रुपये में चार माह से अधिक की सबसे बड़ी गिरावट रही। एडमिसी फॉरेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के आंकड़ों में सुधार के बावजूद तेल आयातकों द्वारा डॉलर की खरीदारी से डॉलर/रुपये में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया।
इराक में संकट के चलते आपूर्ति बाधित होने की आशंका से क्रूड की कीमतों में तेजी का रुख है। घरेलू मुद्रा बाजार में शुक्रवार को रुपये में गिरावट के साथ 59.31 पर कारोबार शुरू हुआ।
पिछले कारोबारी सत्र रुपया 59.25 पर रहा था। सत्र के दौरान यह 59.80 के निचले स्तर तक गिरा और आखिर में 52 पैसे टूटकर 59.77 पर बंद हुआ। 24 जनवरी 2014 के बाद रुपये में यह सबसे बड़ी गिरावट है।