अलग-अलग राज्यों में स्थित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के आपस में विलय करने का रास्ता खोलने की सरकार की तैयारी है। सरकार इसके जरिए आने वाले दिनों में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के विलय प्रक्रिया को सरल करना चाहती है। इसके लिए मौजूदा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक एक्ट -1976 में प्रस्तावित संशोधन को केंद्रीय मंत्रिमंडल जनवरी में मंजूरी भी दे चुका है।
सूत्रों के अनुसार, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक संशोधन विधेयक में इस तरह का प्रस्ताव शामिल किया गया है, जिससे अलग-अलग राज्यों में स्थित आरआरबी का भी आपस में विलय किया जा सकेगा। अधिकारी के अनुसार, आरआरबी के आपस में विलय की चल रही प्रक्रिया में कुछ अड़चने आई थीं, जिसकी वजह से 82 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की संख्या घटाकर 46 करने के लक्ष्य को अभी पूरा नहीं किया जा सका है। अभी तक विलय के जरिए 57 तक आरआरबी की संख्या पहुंच पाई है।
अधिकारी ने बताया कि आरआरबी विलय की प्रक्रिया के जरिए उन्हें वित्तीय रूप से मजबूत करना है, जिससे सीबीएस प्रणाली, इंटरनेट बैंकिंग और एटीएम की सुविधा देने में अड़चन न आए। विलय प्रक्रिया में यह भी ध्यान रखा गया कि वित्तीय रूप से दो कमजोर आरआरबी का आपस में विलय न हो। पर कई ऐसे राज्य हैं, खास तौर से पूर्वोत्तर राज्यों में, जहां वित्तीय रूप से मजबूत आरआरबी की संख्या कम है।
मौजूदा कानून के तहत दूसरे राज्यों की आरआरबी का आपस में विलय नहीं हो सकता है। ऐसे में नए कानून के पारित होने से इस तरह के विलय किए जा सकेंगे। मौजूदा कानून के तहत आरआरबी में केंद्र सरकार की 50 फीसदी, राज्य सरकार की 15 फीसदी और प्रायोजक बैंक की 35 फीसदी हिस्सेदारी होती है। नए संशोधित कानून के जरिए सरकार आरआरबी में ज्यादा पूंजी निवेश का करने का भी रास्ता तैयार कर रही है।