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रोड रेगुलेटर एक अच्छा आइडिया

Thu, 28 Feb 2013 11:40 PM IST
विनायक चटर्जी, अध्यक्ष फीडबैक इनफ्रा
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सड़कों के निर्माण से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र नियामक की स्थापना सरकार की एक नई पहल है। सड़क क्षेत्र की चुनौतियों को देखते हुए हाईवे रेगुलेटर की जरूरत भी महसूस की जा रही थी। हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बाकी कई अहम मुद्दों का वित्त मंत्री ने बस हल्का का जिक्र किया है। इनमें इंफ्रा डेट फंड, कोयले का आयात और गैस की कीमतों से जुड़े मामले शामिल हैं।
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ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए सनसेट के प्रावधान को एक साल और बढ़ाया जाना एक अच्छा कदम है, लेकिन यह काफी नहीं है। उम्मीद जताई जा रही थी कि सरकार सनसेट क्लॉज को कम से कम मार्च 2017 तक  के लिए बढ़ाएगी। क्योंकि, तभी 12वीं पंचवर्षीय योजना का समय भी पूरा होगा। स्टीम और कोयले के बीच आयात शुल्क के अंतर की वजह से पैदा असमंजस को दूर करना बेहद जरूरी था। सरकार ने इसे सुलझा दिया है। अब दोनों तरह के कोयले पर समान आयात शुल्क लगेगा।

बजट में सरकार ने पवन ऊर्जा, कचरे से ऊर्जा, अंतरिक जलमार्गों, भंडारण, ग्रामीण सड़कों, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और शहरी आवास पर खर्च बढ़ाने और इनसे जुड़े कई कई कदम उठाने की बात कही है। कुल मिलाकर, बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र पर काफी बात हुई है। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के रास्ते में आ रही बाधाओं को दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी। तभी इस क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार हो सकता है।
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