आर्थिक सुस्ती के बावजूद कर संग्रह बढ़ाने की कोशिशें वित्त मंत्रालय की कोशिशें रंग दिखा रही हैं। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जनवरी तक कुल प्रत्यक्ष करों का संग्रह पिछले साल की तुलना में 7 फीसदी बढ़कर 4.55 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस साल सरकार ने प्रत्यक्ष करों के तौर पर 5.70 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया है, जो पूरा होता दिख रहा है।
वित्त मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जनवरी के दौरान शुद्ध प्रत्यक्ष करों का संग्रह 12.5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 3.90 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हालांकि यह बढ़ोतरी 15 फीसदी के लक्ष्य से कम है, लेकिन वित्त वर्ष के आखिरी दो महीनों में इसकी भरपाई हो सकती है। प्रत्यक्ष करों में सबसे ज्यादा करीब 14 फीसदी वृद्धि आयकर की वसूली में हुई, जबकि कॉरपोरेट टैक्स में सिर्फ 3.71 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इसी तरह वैल्थ टैक्स का संग्रह भी केवल 2.85 फीसदी बढ़ा है, जबकि सिक्योरिटिज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) में करीब 10 फीसदी की कमी आई है। वेल्थ और कॉरपोरेट टैक्स में अपेक्षाकृत कम वृद्धि और एसटीटी में कमी आना आर्थिक सुस्ती की तरफ इशारा करता है।
पिछले वित्त वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था 7.3 फीसदी की विकास दर से बढ़ी थी, जबकि इस साल वृद्धि दर छह फीसदी से नीचे आ गई है। ऐसे में राजस्व लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कर संग्रह से जुड़े विभागों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। खुद वित्त मंत्री ने अधिकारियों को इस बाबत सख्त निर्देश दिए हैं।