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रिलायंस, महिंद्रा, टाटा बनाएंगी रक्षा उत्पाद

Thu, 09 Oct 2014 06:44 PM IST
सुजय मेहदूदिया/नई दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को जोरदार प्रोत्साहन देते हुए केंद्र सरकार ने रक्षा मैन्यूफैक्चरिंग के अहम प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इससे रिलायंस इंडस्ट्रीज, महिंद्रा, भारत फोर्ज और टाटा समूह जैसी कंपनियों के लिए रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर में मैन्यूफैक्चरिंग का रास्ता साफ हो गया है। इससे देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
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मोदी सरकार द्वारा मंजूर किए गए बड़े प्रस्तावों में से एक रिलायंस एयरोस्पेस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड का है। रिलायंस एयरोस्पेस अब लड़ाकू विमानों के हथियार लांचर बनाने के लिए लाइसेंस प्रक्रिया शुरू कर सकती है। वास्तव में इसका श्रेय रक्षा एवं एयरोस्पेस विशेषज्ञ एवं रिलायंस के नए वेंचर के पूर्व सीईओ एवं प्रेसिडेंट डॉ. विवेक लाल को जाता है। डॉ. लाल की यह कंपनी बनाने और पेशेवरों में एक टीम तैयार करने में मुख्य भूमिका है।

विदेशी निवेश के संबंध में संयुक्त रक्षा उपक्रम में एक सिंगल भारतीय इकाई के पास न्यूनतम 51 फीसदी हिस्सेदारी रहने के नियमों में मामूली बदलाव से रिलायंस एयरोस्पेस और पुंज लॉयड को लाइसेंस हासिल करने में मदद मिली, जिसके लिए वह लंबे समय से प्रतीक्षा कर रही थीं। रक्षा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाकर 49 फीसदी करने के साथ सरकार ने इस नियम को भी हटा दिया, जो कि वर्षों से पॉलिसी का हिस्सा था। विशेष मामलों में 100 फीसदी एफडीआई को अनुमति है। पहले के नियमों के तहत रिलायंस एयरोस्पेस को लड़ाकू विमानों के लिए वेपन लांचर बनाने का लाइसेंस हासिल करने की अनुमति नहीं थी। क्योंकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज में प्रमोटर की हिस्सेदारी 45.3 फीसदी है।
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रक्षा उत्पादन के लिए जिन कंपनियों के अहम प्रस्तावों को मंजूरी मिली है, उनमें रिलायंस एयरोस्पेस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड, भारत फोर्ज लिमिटेड, महिंद्रा टेलीफोनिक इंटीग्रेटेड सिस्टम्स लिमिटेड, पुंज लॉयड इंडस्ट्रीज लिमिटेड, महिंद्रा एयरो स्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, टाटा एडवांस्ड मैटेरियल्स लिमिटेड शामिल हैं। इनमें से अधिकांश के प्रस्ताव सरकार के पास सालों से लंबित थे। अतिरिक्त 14 लंबित रक्षा आवेदनों के मामले में आवेदकों को सूचित कर दिया गया है कि बड़ी संख्या में रक्षा उपकरणों को लाइसेंस से मुक्त कर दिया गया है जिसके चलते उनके उत्पादन के लिए अब लाइसेंस की जरूरत नहीं है।

माना जा रहा है कि इन आवेदनों को मंजूरी से रक्षा क्षेत्र में उन्नत मैन्यूफैक्चरिंग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा, केंद्र सरकार औद्योगिक लाइसेंस में सालाना उत्पादन क्षमता की शर्त हटाने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके साथ ही सरकार गृह मंत्रालय, राज्य सरकारों, सरकारी कंपनियों और अन्य वैध रक्षा लाइसेंसधारी कंपनियों के नियंत्रण वाली कंपनियों को बिना रक्षा उत्पादन विभाग की आवश्यक मंजूरी के लाइसेंस्ड उत्पादों को बेचने की अनुमति देने की भी योजना पर काम कर रही है। इस बात पर सहमति है कि इन नियमों में ढील कंपनी द्वारा द्विवार्षिक रिटर्न जमा करने की शर्त पर ही मिलेगी। डीआईपीपी उक्त फैसलों को जल्द ही अधिसूचित कर देगा।
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