रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो केंद्रीय बैंक बैंकिंग सिस्टम में तरलता की कमी को दूर करने के लिए कदम उठाएगा।
यहां एक सेमीनार के दौरान गोकर्ण ने कहा कि हालांकि बैंकिंग सिस्टम में तरलता की कमी की स्थिति अभी नियंत्रण में है, यदि जरूरत पड़ी तो रिजर्व बैंक आवश्यक कदम उठाएगा।
उन्होंने कहा कि आमतौर पर रिजर्व बैंक इस स्थिति से निबटने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) का सहारा लेता है। यदि हमें लगता है कि बैंकिंग सिस्टम में दबाव लगातार बना हुआ है, तो निश्चित रूप से हमारे पास स्थिति को संभालने की क्षमता है।
बैंकिंग सिस्टम में गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) के बारे में गोकर्ण ने कहा कि कुछ आर्थिक व्यवस्थाओं के चलते एनपीए का दबाव बढ़ रहा है। लेकिन एक बार एनपीए का घटना शुरू हो गया तो यह कारोबारी तंत्र में एक सुधार होगा।