मालदीव के माले हवाई अड्डे के ठेके के मामले में भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी जीएमआर को एक और झटका लगा है। सिंगापुर की अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि मालदीव की सरकार को कंपनी से एयरपोर्ट का ठेका वापस लेने का अधिकार है।
मालदीव के राष्ट्रपति के मोहम्मद वाहीद के प्रेस सचिव मसूद इमाद ने एक मेल के जरिये बताया है कि सिंगापुर के अपीलीय न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि मालदीव सरकार के पास ठेका वापस लेने का पूरा अधिकार है। साथ ही उन्होंने कहा है कि सरकार अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार एयरपोर्ट के हस्तांतरण की प्रक्रिया को जारी रखेगी।
इमाद ने कहा कि हमने इस मामले में कोई भी गैरकानूनी काम नहीं किया है, जो भी किया गया है वह पूरी तरह कानूनी दायरे के तहत है और अब सिंगापुर की अदालत ने भी हमें अपने निर्णय को अमल में लाने की इजाजत दे दी है। मामले में कोई भी विवाद होने की स्थिति में उसका निपटारा सिंगापुर या यूनाइटेड (यूके) के कानून के आधार पर किए जाने की शर्त ठेके की निविदा में शामिल थी।
गौरतलब है कि 3 दिसंबर को सिंगापुर हाईकोर्ट द्वारा जीएमआर को माले एयरपोर्ट का ठेका रद्द किए जाने के खिलाफ स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) दिए जाने के बावजूद मालदीव सरकार ने जीएमआर से एयरपोर्ट का संचालन छीन कर अपने हाथ में लेने की बात कही थी। सरकार ने इसके लिए 8 दिसंबर से हवाई अड्डे का संचालन खुद करने की बात कही थी।
इससे पहले राष्ट्रपति मोहम्मद वाहीद के नेतृत्व वाली मालदीव सरकार ने 2010 में तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद के कार्यकाल के दौरान जीएमआर को दिए गए ठेके को ‘संदेहास्पद स्थितियों में किया गया करार’ कहते हुए 27 नवंबर को जीएमआर का रद्द कर दिया था।
भारत ने ठेका रद्द किए जाने का जोरदार विरोध करते हुए मालदीव सरकार के निर्णय को विदेशी निवेशकों के लिए ‘बड़ा बुरा संकेत’ बताया था। करीब 50 अरब डॉलर का ठेका रद होने पर जीएमआर ने मालदीव सरकार के निर्णय के खिलाफ सभी प्रकार के कानूनी उपाय करने की बात कहते हुए कहा था उसका ठेका रद्द किए जाने के पीछे किसी विदेशी शक्ति का हाथ होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।