भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा कि मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा बरकरार है। खाद्य और कमोडिटी की कीमतों में इजाफे को देखते फिलहाल मौद्रिक नीति में लचीला रूख अपनाए जाने की संभावना सीमित है।
जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों की बैठक में उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आने लगी है। जनवरी में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति तीन साल के न्यूनतम स्तर पर आ गई है। उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने जनवरी में नौ महीने में पहली बार नीतिगत दरों में एक चौथाई प्रतिशत कमी की है।
आरबीआई का कहना है कि भविष्य में इसमें और कमी करने से पहले वह राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में लाने के लिए सरकार द्वारा बजट में किए जाने वाले उपायों पर गौर करेगा। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 5.4 फीसदी पर रहा है।