यदि आपने किसी फाइनेंस कंपनी से कर्ज लिया हुआ है, तो उसकी ईएमआई चुकाना नए साल से आपके लिए आसान होने जा रहा है। रिजर्व बैंक ने गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को कहा है कि वह एक जनवरी 2014 से इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग प्रणाली (ईसीएस) लागू करें।
रिजर्व बैंक के इस निर्देश के बाद होम लोन देने वाली हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के साथ-साथ वाहन कर्ज देने वाली फाइनेंस कंपनियों को भी ईसीएस व्यवस्था लागू करनी होगी।
सभी एनबीएफसी को नए साल से सीटीएस-2010 प्रणाली लागू करना अनिवार्य होगा। जिसके जरिए ग्राहकों के चेक काफी कम समय में क्लीयर हो सकेंगे। रिजर्व बैंक ऐसे निर्देश बैंकों को पहले से ही जारी कर चुका है।
रिजर्व बैंक के अनुसार जिन जगहों पर ईसीएस सुविधा दी जा सकती है, वहां कंपनियां ग्राहकों से ईएमआई के लिए किसी भी तरह का पोस्ट डेटेड चेक आदि न लें। सभी एनबीएफसी को 31 दिसंबर 2013 तक इस व्यवस्था को लागू करने के लिए अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करना जरूरी होगा।
क्या है ईसीएस
इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सिस्टम के तहत उपभोक्ता के एक निश्चित बैंक खाते से हर महीने ईएमआई की रकम कर्ज देने वाले बैंक या फाइनेंस कंपनियों के जरिए खुद ही काट ली जाती है। ऐसे में ग्राहक को ईएमआई देने के लिए चेक आदि जमा करने की जरूरत नहीं रहती है।