वैश्विक निवेश बैंकिंग की बड़ी कंपनियों का कहना है कि आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट के संकेत और मुद्रास्फीति के कम होने को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) नीतिगत ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है।
आरबीआई 19 मार्च को मौद्रिक नीति की तिमाही मध्यावधि समीक्षा करेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि भले ही रिजर्व बैंक नीतिगत ब्याज दरों में कटौती कर दे लेकिन भविष्य के बारे में उसका रुख अधिक नहीं बदलेगा और यह सतर्कता भरा होगा।
वैश्विक बैंकिंग दिग्गज कंपनियों एचएसबीसी, स्टैंडर्ड चार्टर्ड, सिटीग्रुप, बार्कले और क्रेडिट सुइस की राय है कि समीक्षा बैठक में आरबीआई अपने रेपो या अल्पकालिक उधार दरों में कमी कर सकता है।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड की अर्थशास्त्री अनुभूति सहाय ने एक रिपोर्ट में कहा कि थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति फरवरी में 6.84 प्रतिशत रही जो अनुमान से थोड़ी अधिक है लेकिन हमें अगले सप्ताह रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कमी की उम्मीद अभी भी है।
बार्कले कैपिटल के अर्थशास्त्री सिद्धार्थ सान्याल ने एक अनुसंधान पत्र में कहा कि अगर एलपीजी व डीजल के दाम में बढ़ोतरी नहीं की जाती तो हमारा अनुमान है कि थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति फरवरी में 6.3 प्रतिशत के आसपास रहती।
वहीं दूसरी ओर निवेशक भी आरबीआई की तिमाही मध्यावधि समीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। आरबीआई नीतिगत दरों में कटौती के मसले पर क्या रुख अपनाता है इसे लेकर आशंका बनी हुई है। दहाई के अंक पर पहुंच चुकी महंगाई दर ने नीतिगत दरों में कटौती की गुंजाइश कम कर दी है। लिहाजा बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है।