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'आरबीआई के पास कर्ज सस्ता करने का मौका'

Fri, 03 May 2013 01:45 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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रिजर्व बैंक को भले ही ब्याज दरों में कटौती करने की गुंजाइश कम नजर आ रही है लेकिन बैंकर्स को शुक्रवार को आरबीआई की पेश होने वाली मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बनी हुई है।
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बृहस्पतिवार को एशियाई विकास बैंक के कार्यक्रम में आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ और एमडी चंदा कोचर ने कहा कि जिस तरह महंगाई दर में कमी आ रही है, उसे देखते हुए रिजर्व बैंक के पास ब्याज दरों में कटौती करने की गुंजाइश है।

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को पटरी में लाने के लिए जरूरी है कि निवेश में तेजी लाई जाए। इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है।

सस्ती ब्याज दरों की आस
इध्ार, शुक्रवार को पेश होने वाली मौद्रिक नीति में सस्ती ब्याज दरों की आस लगाए लोगों को रिजर्व बैंक से निराशा हाथ लग सकती है।

रिजर्व बैंक को मौजूदा आर्थिक संकेतों पर ग्रोथ के लिए कदम उठाने का अवसर कम नजर आ रहा है। यही नहीं नीतिगत फैसलों में अड़चन, बढ़ता चालू खाता घाटा, ऊंची महंगाई दर से रिजर्व बैंक को वित्त वर्ष 2013-14 में भी अर्थव्यवस्था के क्षमता से कम प्रदर्शन करने की आशंका है। इन परिस्थितियों को देखते हुए रिजर्व बैंक का मानना है कि उसके पास ब्याज दरों में कटौती करने की गुंजाइश ज्यादा नहीं है।
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छह फीसदी रहेगी विकास दर
बृहस्पतिवार को आरबीआई द्वारा जारी ‘मैक्रोइकोनॉमिक एंड मॉनेटरी डेवलपमेंट इन 2012-13’ के अनुसार ऊंची महंगाई दर, बढ़ता चालू खाता घाटा, निवेश में आई कमी, संस्थागत अवरोध जैसे घरेलू कारणों के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर सुस्ती, अर्थव्यवस्था में सुधार के सबसे प्रमुख अवरोध हैं।

रिजर्व बैंक के अनुसार सर्वेक्षण के तहत यह पाया गया है कि साल 2013-14 में विकास दर पांच फीसदी की तुलना में छह फीसदी रहेगी। इसी तरह, महंगाई दर थोड़ी कम होकर 7.3 फीसदी से 6.5 फीसदी पर आ जाएगी।

ऐसे में महंगाई दर के चालू वित्त वर्ष में भी चिंता का विषय बने रहने की संभावना है। रिजर्व बैंक के अनुसार मौजूदा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और थोक मूल्य सूचकांक ऊंची महंगाई के संकेत हैं। रिजर्व बैंक के लिए ग्रोथ संबंधी कदम उठाने की गुंजाइश कम है।

रिपोर्ट के अनुसार 2012-13 में खनन और मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में गतिविधियां ठहर गईं। इसी तरह बारिश कम होने से कृषि उत्पादन पर भी नकारात्मक असर पड़ा है। जिसे देखते हुए साल 2012-13 की चौथी तिमाही में ग्रोथ कम रहने की संभावना है। संस्थागत अवरोधों की वजह से बिजली की कमी, कोयले और प्राकृतिक गैसों की कमी भी रही थी, जिसका अहम असर औद्योगिक उत्पादन पर पड़ा है। हालांकि सर्विस सेक्टर में कुछ सुधार होते देखा गया है।

रिजर्व बैंक के अनुसार महंगाई दर ऊंची रहने की वजह से मांग पर भी वित्त वर्ष 2012-13 में असर पड़ा है। साथ ही बचत में भी कमी आई है। जिसका नकारात्मक असर अर्थव्यवस्था पर भी दिखा है। ऐसे में सार्वजनिक और निजी निवेश को बढ़ाकर ही मांग और बचत में आई कमी को दूर किया जा सकता है।

वहीं, निर्यात में आई गिरावट के साथ बढ़ते खर्च से चालू खाता घाटा वित्त वर्ष 2012-13 की तीसरी तिमाही में 6.7 के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया था। चौथी तिमाही में कुछ सुधारों को देखते हुए इसके वित्त वर्ष 2012-13 में 5 फीसदी पर रहने की उम्मीद है। जो सामान्य स्तर से कहीं ज्यादा है।
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