दवा बनाने वाली कंपनी रैनबैक्सी लेबोरेटरीज लिमिटेड को खाद्य, औषधि एवं कास्मेटिक कानून के उल्लंघन के मामले में अमेरिकी विधि मंत्रालय को 50 करोड़ डॉलर का जुर्माना देना होगा।
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण साहनी ने बताया कि रैनबैक्सी को कानून मंत्रालय के साथ किए गए समझौते के तहत जुर्माने की यह भारी भरकम राशि देनी होगी।
कंपनी पिछले कुछ समय से यह समझौता करने के लिए प्रयासरत थी। उस पर 1 अप्रैल 2003 से 16 सितंबर 2010 के बीच अमेरिका के सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम के समक्ष फर्जी दावे पेश करने का आरोप है।
अमेरिकी सरकार ने रैनबैक्सी पर घटिया दवाओं के उत्पादन, दस्तावेजों में हेराफेरी और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को जानबूझकर गलत जानकारी देने के मामले की जांच के बाद कंपनी पर आरोप तय किए थे।
रैनबैक्सी के ही पूर्व कार्यकारी अधिकारी दिनेश ठाकुर ने एक याचिका दायर करके अमेरिकी सरकार को कंपनी की कारस्तानियों से अवगत कराया था।
कंपनी पर लगाए गए 50 करोड़ डॉलर के जुर्माने में से 4.9 करोड़ डॉलर (266 करोड़ रुपये) की रकम ठाकुर को दी जाएगी।
ठाकुर ने बताया कि कंपनी को अनियमितताओं की जानकारी दी गई थी, लेकिन उसने सुधार की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया, जिसके बाद उन्हें मजबूरन अदालत की शरण में जाना पड़ा।
गौरतलब है कि वर्ष 2008 में एफडीए ने अमेरिका में कंपनी की 30 दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी थी। एफडीए ने वर्ष 2009 में कंपनी पर उत्तर भारत के एक संयंत्र में आंकड़ों और परीक्षण रिपोर्टों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए दवाओं की समीक्षा रोक दी थी।
रेनबैक्सी की स्थापना 1961 में भारत में हुई थी, लेकिन 2008 में इसके तत्कालीन मालिकों ने 4.5 अरब डॉलर में इसे जापान के दाइची सांक्यो समूह को बेच दिया था। इस कंपनी का कारोबार 43 देशों में फैला है और आठ देशों में इसकी 16 निर्माण इकाइयां हैं।