दवा कंपनी रैनबैक्सी ने अपने दो संयंत्रों में बनी दवाओं की गुणवत्ता पर अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग (यूएस-एफडीए) द्वारा रोक लगाए जाने के बाद इन संयंत्रों से दवाओं की आपूर्ति को रोक दिया है।
रैनबैक्सी को 2008 में खरीदने वाली जापानी दवा कंपनी दाइची ने बताया कि उसके स्वामित्व वाली रैनबैक्सी ने अपनी क्वालिटी कंट्रोल की जांच-परख के मद्देनजर अपने तोंसा (पंजाब) और देवास (मध्य प्रदेश) प्लांट से दवाओं की आपूर्ति को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है।
रैनबैक्सी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को इस बारे में बताया है कि उसके दोनों संयंत्रों में सक्रिय औषधीय तत्वों (एपीआई) के उत्पादन और नियंत्रण की प्रक्रिया की व्यापक जांच की जा रही है।
जांच पूरी होने के बाद यूएस-एफडीए को दवाओं की गुणवत्ता के बारे में आश्वस्त करने के बाद ही आपूर्ति दोबारा शुरू की जाएगी। रैनबैक्सी के मुताबिक यह जांच सतर्कता के तौर पर की जा रही है।
आपूर्ति बंद किए जाने की खबर का रैनबैक्सी के शेयर पर कोई नकारात्मक असर नहीं दिखा, बल्कि बीएसई में कंपनी का शेयर 0.99 फीसदी या 3.60 रुपये की बढ़त दर्ज करते हुए 367.05 रुपये के भाव पर बंद हुआ।
मामले से जुड़े सूत्रों का बताना है कि रैनबैक्सी के दोनों प्लांटों से अमेरिका को आपूर्ति बंद किए जाने का असर यूरोप को किए जाने वाले निर्यात के साथ-साथ भारत में आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
गौरतलब है कि जनवरी के अंत में यूएस-एफडीए ने कंपनी को तोंसा प्लांट में उत्पादित एपीआई की अमेरिका में बिक्री पर रोक लगा दी थी। इससे पहले यूएस-एफडीए सितंबर 2013 में मानकों के उल्लंघन के आरोप में रैनबैक्सी के मोहाली प्लांट से भी दवाओं के आयात पर रोक लगा चुका है।
इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के पाओटा साहिब संयंत्र में बनी दवाओं पर भी यूएस-एफडीए 2008 में एक बार रोक लगा चुका है।