यात्री किराए और मालभाड़े की कमाई में गिरावट को देखते हुए सरकार रेलवे के कायाकल्प में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने में जुटी है। मंगलवार को पेश रेल बजट में नई रेल लाइनों के निर्माण से लेकर कर्मचारियों के आवास तक हर क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) की गूंज रही। रेल मंत्री ने निजी भागीदारी के जरिए आगामी वित्त वर्ष में छह हजार करोड़ रुपये जुटाने का दावा तो किया लेकिन इसका कोई खाका उन्होंने पेश नहीं किया है।
12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान सरकार ने रेल के लिए पीपीपी के जरिए 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश जुटाने का लक्ष्य तय किया है। बजट भाषण में रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि 2012-13 के दौरान रेल में करीब 63 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा।
इसमें से 15 हजार करोड़ रुपये बाजार से कर्ज के तौर पर और 6 हजार करोड़ रुपये पीपीपी के जरिए आएंगे। बजट भाषण में रेल मंत्री ने कहा कि मुंबई में ऐलिवेटेड रेल कॉरिडोर, डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के कुछ हिस्से, स्टेशनों के सुधार और फ्रेड टर्मिनल आदि क्षेत्रों निजी निवेश आ सकता है। इसमें राज्य सरकारों के सहयोग की जरूरत है।
रेलवे में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ने से सबसे ज्यादा फायदा एलएंडटी, फीडबैक इंफ्रा, जीवीके, जीएमआर जैसी कंपनियों को मिलेगा। फीडबैक इंफ्रास्ट्रक्चर की वित्तीय सेवाओं के प्रेसीडेंट ध्रुब पुरकायस्थ का कहना है कि रेलवे की वित्तीय स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। ऐसे में लीक से हटकर वित्तीय संसाधन जुटाने की जरूरत है।
रेलवे की तरह कुछ साल पहले सरकार ने हाईवे निर्माण में भी इसी तरह निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया था। लेकिन आर्थिक सुस्ती, वित्तीय दिक्कतों और मंजूरी में देरी ने हाईवे क्षेत्र में पीपीपी के दावों पर पानी फेर दिया है।
निजी भागीदारी के हवाले
:- चंडीगढ़ में सिग्नलिंग उपकरण प्रोजेक्ट
:- रेलवे कर्मचारियों के आवास
:- रेलवे ओवरब्रिज
:- तीन नई रेलवे लाइनों का निर्माण
:- एक रेल लाइन का दोहरीकरण