भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि अर्थव्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है। इसलिए रुपये की गिरावट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
रिजर्व बैंक की नजर
खुदरा महंगाई बढ़ने और तेल कीमतों के इस पर पड़ते असर पर रिजर्व बैंक की नजर है और मौद्रिक नीति के निर्धारण में इन बातों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने बाजार में दिख रही अस्थिरता ओर विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा घरेलू बाजार से रकम निकाले जाने की आशंका को लेकर भी भरोसा दिलाया कि इससे कोई संकट पैदा नहीं होगा।
आरबीआई गवर्ननर ने उम्मीद जताई कि चालू वित्त वर्ष में चालू खाते का घाटा (कैड) सिमट कर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के तीन फीसदी से नीचे आ जाएगा। यह 56 अरब डॉलर के करीब रहेगा।
उन्होंने कहा कि अच्छे मानसून, निर्यात में बढ़ोतरी और ऊर्जा (पावर) क्षेत्र में सुधार दूसरी छमाही में देश की आर्थिक विकास दर को बढ़ाएंगे। इसके अलावा उन्होंने बैंकिंग तंत्र में नकदी बढ़ाने के लिए आरबीआई द्वारा सोमवार को ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) के जरिए 8,000 करोड़ रुपये डालने की घोषणा भी की।
अस्थिरता केवल भारत में ही नहीं
राजन ने आज कहा कि कैड को नीचे लाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और यह 2013-14 में घटकर 56 अरब डॉलर तक आ जाएगा। उन्होंने कहा कि कैड के लिए वित्त पोषण को लेकर चिंता की जरूरत नहीं है। एक सप्ताह से डॉलर के मुकाबले रुपये में फिर गिरावट दिखाई देने के बारे में पूछे जाने उन्होंने कहा कि तेल विपणन कंपनियां अपनी डॉलर मांग को पूरा करने के लिए बाजार में फिर से आ गई हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा है। गौरतलब है कि डॉलर के मुकाबले रुपया फिर गिरकर करीब दो माह के निचले स्तर पर पहुंच गया है।
वित्तीय बाजारों की स्थिति के बारे में आरबीआई गवर्नर ने कहा कि अस्थिरता केवल भारत में ही नहीं, दुनिया भर के बाजारों में कमोबेश यही हालात है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के फेडरल रिजर्व की बांड खरीद (क्यूई-3) व प्रोत्साहन पैकेज की वापसी की चर्चाओं के बीच बाजारों में उठापटक बनी हुई है। ऐसे हालात में नकदी को सहज स्तर पर बनाए रखने के लिए रिजर्व बैंक सोमवार को खुला बाजार परिचालन (ओएमओ) के तहत 8,000 करोड़ रुपये अर्थ तंत्र में जारी करेगा। खाद्य महंगाई के फिर बढ़ने पर चिंता जताते हुए राजन ने कहा कि यह चिंता का विषय है।
खुदरा महंगाई
मंगलवार को जारी अक्तूबर माह के आंकड़ों में खुदरा महंगाई सात माह बाद दहाई अंक से ऊपर निकल गई। उन्होंने कहा कि महंगाई और विकास दर (ग्रोथ) को लेकर रिजर्व बैंक पहले से ही चिंतित है। उन्होंने सितंबर के औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के आंकड़ों को लेकर भी निराशा जताई।
बाजार उम्मीदों से काफी कम हैं। सितंबर में औद्योगिक उत्पादन में महज दो फीसदी की वृद्धि हुई है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के फिर से बढ़ने की उम्मीद जताते हुए रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा कि अर्थव्यवस्था में कमजोरी को लेकर चिंता है। उन्होंने कहा कि ऋण की जो निकासी हुई थी उसकी वापसी हो गई है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा घरेलू बाजार से रकम निकालने को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।