पिछले कृषि वर्ष (2011-12) में मानसून की मेहरबानी से बना अनाज उत्पादन का रिकॉर्ड चालू कृषि वर्ष (2012-13) में कायम नहीं रह पाएगा। खरीफ सीजन के दौरान मानसून की तुनकमिजाजी का असर फसलों पर पड़ा है। इसके चलते न सिर्फ अनाज की उत्पादकता बल्कि पैदावार भी प्रभावित होने की आशंका बन गई है।
मगर राहत की बात यह है कि इसकी काफी हद तक भरपाई रबी फसलों से हो सकती है। यह अनुमान वित्त मंत्रालय ने अपने अर्ध वार्षिक आर्थिक विश्लेषण में लगाया है। मंत्रालय का कहना है कि खरीफ की भरपाई के लिए रबी फसलों के लिए अतिरिक्त भूमि और उन्नत बीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
अर्ध वार्षिक आर्थिक विश्लेषण में पिछले वर्ष चौथे अग्रिम अनुमान के मुकाबले चालू वर्ष के खरीफ सीजन के पहले अग्रिम अनुमान में अनाज उत्पादन 127 लाख टन घटने का अंदेशा जताया गया है। इसी प्रकार तिलहन उत्पादन में 20.10 लाख टन और गन्ना उत्पादन में 223 लाख टन की कमी होने की आशंका व्यक्त की गई है।
कपास का उत्पादन भी 18 लाख गांठ कम होने का अनुमान लगाया गया है। सरकार ने उम्मीद व्यक्त की है कि अनाज उत्पादन हुई कमी को रबी फसलों से पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने रबी फसलों की अतिरिक्त भूमि पर बुवाई करने के साथ ही उन्नत बीजों का इस्तेमाल और समय पर खाद की उपलब्धता करायी है।
आर्थिक विश्लेषण में सरकार ने दावा किया है कि अनाज उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी के पीछे फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में आशातीत बढ़ोतरी किया जाना है। सरकार ने खरीफ सीजन में धान के एमएसपी में 15.7 फीसदी, कपास में 28.6 फीसदी, मूंग व उड़द में 10 से 13 फीसदी, मूंगफली में 37 फीसदी, सोयाबीन में 33.3 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी की है।
किसानों को एमएसपी का लाभ मिले। इसके लिए भारतीय खाद्य निगम की खरीद को भी बढ़ाया गया है। अनाज भंडारण के लिए अतिरिक्त गोदामों की व्यवस्था की गई है।