फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदलते माहौल में सरकारी बैंक होंगे ज्यादा प्रोफेशनल

Mon, 21 Jul 2014 03:08 AM IST
नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
नई सरकार के आने के बाद किस तरह का असर दिख रहा है, अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए किन कदमों की जरूरत है?
विज्ञापन


नई सरकार से माहौल में सकारात्मक बदलाव हुआ है, सरकार की नीयत स्पष्ट है। महंगाई में कमी आई है, औद्योगिक उत्पादन में भी सुधार के संकेत हैं। इसके अलावा हाल ही में सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने कई अहम कदम उठाए हैं, जिससे निश्चित तौर पर अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। लेकिन कुछ कड़े कदम भी उठाने होंगे। मसलन सब्सिडी बिल, बढ़ते खर्च में कटौती जैसे कदमों को उठाए जाने की जरूरत है। हालांकि ऐसे कदमों को उठाते वक्त आम-आदमी के हितों को भी ध्यान रखना होगा।

हाल ही में आरबीआई ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को रिवाइव करने के लिए बैंकों को लंबी अवधि के कर्ज देने और बांड लाने की अनुमति दी है। इसका किस तरह से असर होगा?
विज्ञापन


आरबीआई ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए लंबी अवधि के कर्ज पर एसएलआर और सीआरआर की अनिवार्यता को खत्म किया है। यह कदम इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री को मजबूती देगा। बैंकों के पास कर्ज देने के लिए ज्यादा पूंजी होगी। अभी तक एसएलआर और सीआरआर की बाध्याता होने से बैंक इस तरह के उत्पादों से बचते थे। नए कदम से बैंक आसानी से इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को कर्ज दे सकेंगे।

अफोर्डेबल हाउसिंग सेक्टर को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया गया है। इसका ग्राहकों पर किस तरह से असर होगा, क्या होम लोन सस्ता होगा?

अफोर्डेबल हाउसिंग के तहत अभी तक कीमत को बहुत कम रखा गया था। नए नियमों में इसे मेट्रो शहरों में 65 लाख और छोटे शहरों में 40 लाख रुपये रखा गया है। यह सीमा बहुत व्यावहारिक है। इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा मिलने से बैंक कहीं ज्यादा कर्ज दे सकेंगे। जहां तक इस कदम से ब्याज दरों में कमी की बात है, तो इसका सीधा असर नहीं होगा, क्योंकि ज्यादातर बैंकों के होम लोन बेस रेट पर हैं। ऐसे में बैंक इस कदम से बेस रेट नहीं कम करेेंगे। लेकिन एक बात जरूर है कि रियल एस्टेट सेक्टर को कर्ज सस्ता मिलेगा, जिसका फायदा घरों की कीमतों में कमी के रुप में मिल सकता है।

सरकार ने बैंकों के कंसालिडेशन और सरकारी बैंको में अपनी हिस्सेदारी 51 फीसदी तक लाने की की बात कही है। यह कदम किस तरह से फायदेमंद होगा?

बैंकों का कंसालिडेशन एक स्वागत कदम योग्य है। इसके जरिए बैंकिंग सेक्टर में ग्रोथ दिखेगी। बैंकों की कार्य प्रणाली में उनकी कार्य संस्कृति और उनके द्वारा इस्तेमाल की जा रही तकनीक का अहम स्थान होता है। ऐसे में बैंकों के विलय में इन दोनों मुद्दों को अहम स्थान देना होगा। जहां तक सरकार की हिस्सेदारी कम करने की बात है, तो सरकार बैंकों को ज्यादा पेशेवर बनाना चाहती है। ऐसा कर वह सरकारी बैंकों में निजी बैंकों की तरह पेशेवर रवैया और उसके सरकारी प्रकृति को बरकरार रखना चाहती है। जहां तक पीएनबी की बात है, तो यदि बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी की जाती है, तो मौजूदा बाजार रेट को देखते हुए करीब 5,000 करोड़ रुपये की पूंजी मिलेगी।

पंजाब नेशनल बैंक की विस्तार की क्या योजनाएं हैं, वह किस तरह ग्राहकों के हितों के अनुरूप कदम उठा रहा है?

पिछले दो-ढाई साल से हमने ज्यादा विस्तार की जगह बैंकिंग सेवाओं को बेहतर करने पर जोर दिया है। इसके तहत करीब 400 शाखाओं पर सेल्फ सर्विस एरिया विकसित किए गए हैं। जहां ग्राहकों को जमाएं, निकासी, पासबुक प्रिटिंग जैसी सुविधाएं खुद इस्तेमाल करने को मिलती है। उसके लिए उसे बैंक के कर्मचारी से सहयोग की जरूरत नहीं है।  कुल मिलाकर हमारी कोशिश है कि ग्राहकों की शाखाओं पर निर्भरता कम हो, वहीं बैंक कर्मचारी दूसरी सेवाओं पर ज्यादा जोर दे सकें। इसका परिणाम भी बेहतर हुआ है। शाखाओं की कार्यक्षमता में कहीं तेजी से विस्तार हुआ है।

पावर, सड़क, जैसे बुनियादी उद्योगों के प्रोजेक्ट अटके हुए हैं।, बैंक इन्हें पूंजी देकर रिवाइव क्यों नही कर रहे हैं?

बैंकों के सामने पूंजी देने की समस्या नही हैै। समस्या यह है कि जो प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं, वह कैसे ऑपरेशनल हंो। यदि वह ऑपरेशनल होने की संभावना रखते हैं, तो पूंजी कोई समस्या नहीं है। इसी के मद्देनजर पावर सेक्टर के लिए एक फंड बनाने की बात चल रही है। जिसमें बैंक और बिजली कंपनियां हिस्सेदारी कर अटके प्रोजेक्ट को शुरू कर ऑपरेशनल करने की कोशिश करेंगे। ऐसा ही हाल दूसरे सेक्टर का भी है। यदि इस दिशा में कदम उठाए जाएंगे, तो इसके अच्छे परिणाम आएंगे।
विज्ञापन


चालू वित्त वर्ष में बैंक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाएगा, नई भर्तियों की क्या योजनाएं हैं?

बैंक चालू वित्त वर्ष में करीब 350 शाखाएं खोलेगा। इसी के अनुपात में एटीएम भी खोले जाएंगे। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में हम बिजनेस कॉरस्पॉडेंट मॉडल के तहत भी नई पहल करने जा रहे हैं। इसके तहत बीसी एजेंट की कार्य अवधि को दो भागों में बांटेंगे। एक निश्चित स्थान पर वह तय समय पर दिन में दो बार उपलब्ध रहेगा, जबकि बीच के समय में ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर बैंकिंग सेवाएं देगा। इस कदम से हम लोगों तक उनकी जरूरतों के मुताबिक पहुंच सकेंगे।  साल 2014-15 में बैंक करीब 5,470 क्लर्क और 931 पी.ओ. की भर्तियां करेगा।



और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें