निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से चल रही तमाम कोशिशों के बावजूद रीयल एस्टेट क्षेत्र में प्राइवेट इक्विटी निवेश कम हो रहा है। इस वर्ष की पहली तीन तिमाही के दौरान इस क्षेत्र में प्राइवेट इक्विटी निवेश पिछले साल के मुकाबले करीब 15 फीसदी घटा है।
रीयल्टी की सलाहकार कंपनी कुशमैन एंड वेकफिल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, चालू वर्ष की पहली तीन तिमाही में करीब 35 अरब रुपये का पीई निवेश हुआ है, जो पिछले साल इस अवधि में हुए निवेश से 15 फीसदी कम है। इस दौरान प्राइवेट इक्विटी निवेश वाले कुल 23 सौदे हुए हैं। हालांकि, पीई सौदों की संख्या में ज्यादा गिरावट नहीं आई, लेकिन पूंजी निवेश घटा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल रीयल्टी में पूंजी निवेश से जुड़े सबसे ज्यादा सौदे पहली तिमाही के दौरान हुए। इस साल प्राइवेट इक्विटी के जरिए सबसे ज्यादा 1,380 करोड़ रुपये का निवेश मुंबई के प्रॉपर्टी बाजार में हुआ है, जबकि एनसीआर बंगलूरू के बाद तीसरे स्थान पर है।
कुशमैन एंड वेकफील्ड के कार्यकारी प्रबंध निदेशक संजय दत्त का कहना है कि रीयल एस्टेट क्षेत्र में प्राइवेट इक्विटी निवेश में आई इस गिरावट के पीछे सरकारी नीतियों को लेकर चिंताएं और निवेश को लेकर अनिश्चित माहौल मुख्य वजह हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि आने वाले महीनों के दौरान एनसीआर, मुंबई, पुणे, बंगलूरू और चेन्नई में निवेश बढ़ सकता है। इस साल प्राइवेट इक्विटी के माध्यम से सबसे ज्यादा 20.6 अरब रुपये का निवेश आवासीय परियोजनाओं में हुआ है।
बैंक कर्ज और ग्राहकों के अग्रिम भुगतान के अलावा प्राइवेट इक्विटी रीयल एस्टेट क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए फंड जुटाने का एक प्रमुख माध्यम है। इसमें बढ़ोतरी से अटकी परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद बढ़ती है।