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CRR में कटौती पर संतोष, दरें नहीं घटने पर निराशा

Tue, 30 Oct 2012 08:07 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा पेश की गई चालू वित्तवर्ष की ऋण एवं मौद्रिक नीति की मध्यावधि समीक्षा पर उद्योग जगत ने मिलीजुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उद्योगों ने जहां सीआरआर में कटौती पर संतोष जताया है, वहीं दरों में कटौती नहीं होने पर निराशा भी व्यक्त की है।
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भारतीय उद्योग एवं वाणिज्य महासंघ (फिक्की) के प्रेसिडेंट आरवी कनोरिया ने कहा है कि आरबीआई का ध्यान उच्च मुद्रास्फीति पर बना हुआ है। औद्योगिक उत्पादन को गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती जरूरी थी। इससे बैंकों को पूंजी उपलब्ध होती और उद्योगों को सस्ता कर्ज मिलता।

हालांकि, सीआरआर में कटौती से बैंकों को कुछ नकदी उपलब्ध होगी। उन्होंने इस पर संतोष व्यक्त किया है कि आरबीआई ने बढ़ते घाटे पर चिंता जताई है। साथ ही महंगाई दर नरम पड़ते ही दरों में कटौती का आश्वासन दिया है।
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भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने सीआरआर में कटौती का स्वागत करते हुए कहा कि इससे बाजार में लिक्विडिटी बढे़गी और उद्योग जगत के लिए सकारात्मक संकेत जाएगा। आरबीआई का ध्यान महंगाई को काबू करने पर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आरबीआई जल्दी ही ब्याज दरें घटाएगा, जिससे निवेश और उद्योगों के लिए बेहतर माहौल बने।

भारतीय उद्योग एवं वाणिज्य मंडल (एसौचेम) के अध्यक्ष राजकुमार धूत ने आरबीआई के रुख पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में कटौती उद्योग जगत की जरूरत थी, लेकिन ऐसा नहीं होने से उद्योग निराश है। आरबीआई की नजर में मुद्रास्फीति का दबाव ज्यादा महत्वपूर्ण है।

पिछले दो वर्ष से ब्याज दरें ऊंची बनी हुई और मुद्रास्फीति पर कोई विशेष अंतर नहीं पड़ रहा है। हालांकि पूंजी की लागत बढ़ने से निवेश प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सीआरआर में कटौती का स्वागत किया है।
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