ग्राहक से ऋण वसूलने के लिए बैंक गैर कानूनी रास्ता अपना रहे हैं। खासकर निजी क्षेत्र के बैंक वसूली एजेंटों के जरिए ग्राहकों को डरा-धमकाकर ऋण की वसूली करते हैं। शुक्रवार को संसद में सरकार ने इस बात को स्वीकार करते हुए बताया कि इस मामले में सरकार को लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। सरकार ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कई अहम कदम भी उठाए हैं।
लोकसभा में सरकार ने कहा कि निजी क्षेत्र के बैंक एवं विदेशी बैंक अपने ऋण की वसूली के लिए सबसे अधिक रिकवरी एजेंटों का इस्तेमाल कर रहे हैं। संजय निरूपम और गुरूदास दासगुप्ता के पूरक प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री नमो नारायण मीणा ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऋण वसूली के लिए रिकवरी एजेंटों में ज्यादा विश्वास नहीं रखते। लेकिन निजी और विदेशी बैंक इसके लिए गैर कानूनी रास्ता अपनाते हैं।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष जुलाई से नवंबर के दौरान बैंकिंग लोकपाल के समक्ष ऋण वसूली के लिए एजेंटों के ग्राहकों को परेशान किये जाने के संबंध में निजी क्षेत्र के बैंकों के खिलाफ 72 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। जबकि विदेशी बैंकों के खिलाफ 29 शिकायतें मिली है। मीणा के मुताबिक इस अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के खिलाफ 48 शिकायतें मिली हैं। पांच वर्षों के दौरान लगभग 149 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। जिसमें से 116 का निपटारा कर दिया गया है।