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साइरस अपने निर्णय खुद करें : रतन टाटा

Sat, 15 Dec 2012 12:09 AM IST
मुंबई/एजेंसी
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टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा ने अपने उत्तराधिकारी साइरस मिस्त्री को सलाह दी है कि वह अपने निर्णय खुद करें। दो सप्ताह बाद मिस्त्री 100 अरब डॉलर के टाटा समूह में रतन टाटा की जगह ले लेंगे। रतन टाटा ने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपने उत्तराधिकारी पर अपने आभा मंडल का असर रहने की धारणा को सिरे से खारिज करते हुए कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि किसी पर अपना असर कायम रखना उचित होगा।’
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टाटा 28 दिसंबर को 75 साल की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त हो जाएंगे। टाटा ने अपने से 31 साल छोटे उत्तराधिकारी साइरस मिस्त्री को सलाह दी कि, ‘आप अपने निर्णय स्वयं करें। आपको अपनी आवाज सुननी चाहिए और आपको वही फैसले करने चाहिए जो आप करना चाहते हैं।’ टाटा समूह के मुख्यालय ‘बांबे हाउस’ में दिए साक्षात्कार में रतन टाटा ने समूह के साथ बिताए अपने 50 सालों के बारे में बात की, इनमें से 21 साल वह समूह के चेयरमैन रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों और असफलताओं की चर्चा की। साथ ही साथ सेवानिवृत्ति के बाद की योजनाओं पर भी बात की।

वर्तमान में साइरस मिस्त्री समूह के डिप्टी चेयरमैन हैं। समूह 80 देशों में ऑटोमोबाइल, आईटी, होटल, चाय और स्टील के कारोबार से जुड़ा है। मिस्त्री टाटा के साथ उनके उत्तराधिकारी के रूप में अपने को तैयार करने के लिए उनके साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। ‘क्या आपने मिस्त्री का सफलता का कोई मंत्र दिया है?’, इस सवाल के जवाब में टाटा का कहना था कि ‘नहीं, मैंने उन्हें वही बात कही जो मैंने जेआरडी से कमान संभालते समय खुद से कही थी। किसी की भी पहली प्रतिक्रिया जेआरडी टाटा बनने की थी, क्योंकि आप उनके पदचिन्हों पर चल रहे हैं। मैंने फौरन स्वयं से कहा कि मैं ऐसा कभी नहीं कर सकता। मैं उनकी कितनी भी नकल करने की कोशिश करूं वैसा नहीं बन सकता। इसलिए मैंने खुद जैसा ही बनने ओर जो मुझे सही लगे वही करने का फैसला किया। यही मैंने साइरस को बताया है।’
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नेतृत्व परिवर्तन के दौर में मिस्त्री ने उनसे समय-समय पर पूछा था कि ये ठीक है या फिर वह ठीक है। उन्होंने कहा था कि उन्हें चीजों को इस तरह देखना चाहिए जैसे कि मैं यहां नहीं हूं क्योंकि आपको अपना फैसला कुछ करना चाहिए। टाटा ने मिस्त्री से कहा था, ‘यदि आप मेरी राय चाहते हैं तो मैं दूंगा लेकिन आपको खुद फैसला करना चाहिए और अपने तरीके से सोचना चाहिए और सिर्फ इस तरह सोचना चाहिए कि जो भी फैसला आप करेंगे व जो भी पहल करेंगे उसे जनता की नजर से गुजरना है।’ उन्होंने कहा कि यह परीक्षा उन्होंने स्वयं दी है। यदि यह जनता की नजर में ठीक है तो आगे बढ़ें, लेकिन यदि यह जनता की नजर में खरा नहीं उतरता, तो न करें।

क्या आपके उत्तराधिकारी को आपका परामर्श मिलता रहेगा, इस सवाल के जवाब में टाटा ने कहा कि हां, निश्चित रूप से। उन्हें मालूम है कि कहां मुझसे परामर्श करना है और मुझे भी। सेवानिवृत्ति के बाद भी हम कारोबार को लेकर बातचीत करेंगे और एक-दूसरे के संपर्क में बने रहेंगे। मालूम हो कि, सेवानिवृत्ति के बाद भी रतन टाटा विभिन्न टाटा ट्रस्टों के चेयरमैन बने रहेंगे, जिनकी टाटा संस में कुल हिस्सेदारी 66 फीसदी है।
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