सरकार ने स्वीकार किया है कि गेहूं, चावल, चीनी, दाल और खाद्य तेलों जैसे जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतों में जनवरी से बढ़त का रुख जारी है। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री केवी थॉमस ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह बात स्वीकार की है।
थॉमस ने कहा कि जनवरी के बाद से ही गेहूं, चावल, चीनी, दाल और खाद्य तेलों आदी की कीमतों में बढ़त का रुख देखने को मिल रहा है। हालांकि इसके बावजूद चना दाल, मूंगफली तेल, चीनी, गेहूं और दूध के दाम इस दौरान कमोबेश स्थिर रहे। उन्होंने बताया कि अक्तूबर में चावल के दाम बढ़कर 24.22 रुपये किलो पर पहुंच गए, जोकि जनवरी में 20.51 रुपये प्रति किलो के स्तर पर थे। इसी तरह गेहूं 16.22 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 19.21 रुपये किलो व आटा 17.95 रुपये किलो से बढ़ कर 21.03 रुपये किलो पर पहुंच गया।
उन्होंने बताया कि देशभर में चना दाल का भाव बढ़कर पिछले महीने औसतन 66 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया, जबकि जनवरी में यह 49.19 रुपये किलो थी। इस अवधि में दूध के दाम 30.07 रुपये लीटर से बढ़कर 32.41 रुपये प्रति लीटर हो गए। चीनी के दाम अक्तूबर में 39.75 रुपये किलो रहे। जनवरी में चीनी 33.47 रुपये किलो थी।
खाद्य तेलों की बात करें तो, मूंगफली तेल 110.03 रुपये से बढ़कर 130.26 रुपये किलो और सरसों तेल 91.08 रुपये किलो से बढ़कर 104.73 रुपये किलो पर पहुंच गए। रसोई में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले आलू की कीमतों में दोगुनी बढ़ोतरी देखने को मिली और यह 9.14 रुपये से बढ़कर 18.27 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए। प्याज के दाम 12.7 रुपये किलो से बढ़कर 15.36 रुपये किलो और टमाटर 12.79 रुपये से बढ़कर 20.61 रुपये किलो पर पहुंच गया।
थॉमस ने कहा कि सरकार इन बढ़ती कीमतों पर नजर बनाए हुए है और इन्हें काबू करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। जरूरी चीजों के दामों को काबू में रखने के लिए गेहूं, प्याज, दाल और पाम ऑयल पर आयात शुल्क घटाकर शून्य कर दिया गया है। वनस्पति तेल पर आयात शुल्क घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा सरकार ने ओपेन मार्केट सेल स्कीम (ओएमएसएस) के तहत वाजिब दरों पर बेचने के लिए गेहूं और चावल जारी कर इनकी कीमतों को नियंत्रित करने का प्रयास किया है।