बैंकों और बीमा कंपनियों पर मनी लांड्रिंग का आरोप लगने के बाद, अब वित्तीय नियामक फाइनेंशियल स्टेबिलटी एंड डेवलपमेंट काउंसिल (एफएसडीसी) सख्ती करने के लिए सभी तरह के कदम उठाने की कवायद कर रही है। इसी के तहत केवाईसी मानकों को और सख्त करने और ज्यादा पारदर्शी बनाने की तैयारी है।
सूत्रों के अनुसार एफएसडीसी की अगली बैठक में केवाईसी मानकों को सख्त करने की दिशा में चर्चा की जाएगी। काउंसिल में भारतीय रिजर्व बैंक, बीमा नियामक इरडा, वित्त मंत्रालय के अधिकारी, सेबी, पीएफआरडीए के अधिकारी प्रमुख रूप से शामिल होंगे।
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार मनी लांड्रिंग की जांच में अभी तक जो रिपोर्ट सामने आई है उसके मुताबिक केवाईसी मानकों की कई जगह अनदेखी हुई है। ऐसे में न केवल इन मानकों को सख्त करने की जरूरत है, बल्कि इसे ज्यादा पारदर्शी करने की जरूरत है।
बीमा इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार इरडा भी इस बात पर सहमत है कि केवाईसी मानकों को ज्यादा बेहतर बनाए जाने की जरूरत है। इसी के तहत बीमा इंडस्ट्री के लिए एक कॉमन केवाईसी डाटा बेस भी बनाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।
अभी बीमा इंडस्ट्री में केवाईसी के लिए सभी कंपनियां अपने स्तर पर निगरानी रखती हैं, जिसके तहत कई बार ग्राहकों के तरफ से धोखाधड़ी करने का भी पता नहीं चलता है। इसे देखते हुए एक कॉमन केवाईसी डाटाबेस बन जाने पर ग्राहकों की धोखाधड़ी पर लगाम लग सकेगी।
वहीं वित्त मंत्रालय के अधिकारी का कहना है कि आरबीआई भी इस दिशा में नए बदलाव करने पर विचार कर रहा है, जिससे कि केवाईसी मानकों का सख्ती से पालन हो सके। एफएसडीसी की बैठक में सभी पक्ष मिलकर इस संबंध में कोई रास्ता निकालने की कवायद कर सकते हैं।
वेब पोर्टल कोबरापोस्ट ने पिछले दो महीने में अपने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए बैंक और बीमा दोनों इंडस्ट्री पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है, जिसकी वजह से इसका आरोप है कि वित्तीय इंडस्ट्री में मनी लांड्रिंग का काम आसानी से कर्मचारियों की मिली भगत से किया जा रहा है।