सार्वजनिक वितरण प्रणाली की खामियों को दूर करने में नाकाम रही केंद्र सरकार ने अब सस्ते राशन के बजाय नकद भुगतान की तैयारी शुरू कर दी है। इसकी शुरुआत छह केंद्र शासित प्रदेश से हो रही है। इन राज्यों को तैयारी के लिए दो-तीन महीने का समय दिया है। वहां आगामी जनवरी से खाद्य सब्सिडी का नकद भुगतान मिल सकता है।
मंगलवार को राज्यों के खाद्य मंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय खाद्य मंत्री थॉमस ने कहा कि खाद्य सब्सिडी की बर्बादी रोकने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं, जिनमें सब्सिडी का नकद भुगतान भी शामिल है। इसका ट्रायल चंडीगढ़ सहित छह केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो रहा है। यहां सबसे पहले सभी लाभार्थियों के बैंक खाते खोले जाएंगे और उनके डाटाबेस को पीडीएस से जोड़ा जाएगा। राज्यों को ये सब तैयारियां करनी है इसलिए पहले सिर्फ केंद्र शासित प्रदेशों में इसकी शुरुआत की जा रही है।
इस मौके पर योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने स्पष्ट किया कि नकद भुगतान के बावजूद मौजूदा वितरण प्रणाली को खत्म करने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनाज की खरीद और पीडीएस के जरिए आपूर्ति जारी रखेगी।
नकद भुगतान के जरिए न सिर्फ सब्सिडी का दुरुपयोग रोकने में मदद मिलेगी बल्कि उचित मूल्य की दुकानों की कार्यप्रणाली में भी सुधार आएगा। सस्ते राशन के बजाय नकद भुगतान को लेकर कई राज्यों ने आपत्ति भी जाहिर की है। बेहतर सार्वजनिक वितरण प्रणाली वाले राज्यों जैसे छत्तीसगढ़, केरल और पश्चिम बंगाल मौजूदा प्रणाली में ज्यादा फेरबदल के इच्छुक नहीं हैं।
इसके अलावा लाभार्थी को मिलने वाले नकद भुगतान के दूसरी मदों में खर्च होने जैसे सवाल भी खड़े हो रहे हैं। केंद्रीय खाद्य सचिव सुधीर कुमार का कहना है कि उनकी ओर से नकद भुगतान के लिए राज्यों पर कोई दबाव नहीं है। कई राज्यों ने बैंकों की पहुंच को लेकर अपनी समस्याएं रखी हैं।
उल्लेखनीय है कि देश के 18 करोड़ से ज्यादा परिवार पीडीएस के दायरे में आते हैं। चालू वित्त वर्ष में खाद्य सब्सिडी 91 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। पिछले साल सरकार ने खाद्य सब्सिडी पर करीब 73 हजार करोड़ रुपये खर्च किए थे।
ऑनलाइन मिलेगी पीडीएस की जानकारी
सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी तमाम जानकारियां अब इंटरनेट पर उपलब्ध रहेंगी। इसके लिए एक राष्ट्रीय पारदर्शिता पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल पर सरकारी सस्ते राशन की दुकानों के अलावा एफसीआई के गोदामों और केंद्रीय पूल में उपलब्ध अनाज की स्थिति पर अपडेट रहेगी। सभी राज्य सरकारों को खाद्य विभाग से जुड़ी जानकारियां इस पोर्टल पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।