चेकों के प्रयोग को हतोत्साहित करने के लिए रिजर्व बैंक ने एक डिस्कशन पेपर में सुझाव दिया है कि चेक से नकदी निकालने और जमा करने पर बैंकों को शुल्क लेना चाहिए जबकि सरकारी संस्थाओं को उपयोगिता बिलों का आनलाइन भुगतान करने पर कन्वीनिएंस चार्जेस से छूट देनी चाहिए।
इस पेपर में यह भी कहा गया है कि लोगों के ज्यादा मात्रा व बार-बार नकदी वाले लेन-देन पर भी बैंकों को शुल्क लेना चाहिए। इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं जैसे कि ज्यादा फ्री चेक बुकों पर रोक लगे और इन्हें जारी करने पर मंहगी फीस वसूली जाय। क्रेडिट कार्डों के बिलों का आनलाइन भुगतान अनिवार्य किया जाय व पोस्ट डेटेड चेकों पर पूरी तरह रोक लगाई जाय।
सार्वजनिक स्थानों पर चेक कलेक्शन बाक्सों को रखने को हतोत्साहित किया जाय। नकदी का कम से कम प्रयोग करने वाला समाज बनाने तथा इलेक्ट्रानिक संसाधनों के जरिए भुगतान करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जारी इन सुझावों पर रिजर्व बैंक ने 28 फरवरी तक लोगों की राय मांगी है।
इस पेपर में कहा गया है कि लेन-देन के लिए चेकों के प्रयोग को कम करने के लिए बैंकों को वार्षिक आधार पर मुफ्त चेक बुकें कम से कम देनी चाहिए। निर्धारित संख्या के बाद चेकों का मांगने पर ग्राहकों के पिछले उपयोग के आधार पर शुल्क लगाना चाहिए। चेकों का सबसे ज्यादा उपयोग कारपोरेट व संस्थागत ग्राहक करते हैं। चेकों के जरिए लाभांश वितरित करने पर अतिरिक्त शुल्क वसूला जाय।
इसमें कहा गया है कि नए कर्ज देने में पोस्ट डेटेड चेक लेने पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए और पुराने कर्जों के मामलों में लिए गए ऐसे चेकों को निश्चित समय सीमा के अंदर इलेक्ट्रानिक माध्यमों वाले भुगतान में बदल देना चाहिए।