किसानों को उपज की बेहतर कीमत दिलाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने आगामी पेराई सीजन (13 अक्तूबर- 14 सिंतबर) के लिए गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में लगभग 23 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने बृहस्पतिवार को इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
इसके तहत अगले पेराई सीजन में 9.5 फीसदी रिकवरी वाले गन्ने का न्यूनतम आधार मूल्य 210 रुपये प्रति क्विंटल होगा, जबकि इससे अधिक रिकवरी वाले गन्ने का मूल्य 0.1 फीसदी रिकवरी पर 2.21 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से निर्धारित किया जाएगा।
सीसीईए की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने बताया कि सरकार ने उपज लागत में हुई बढ़ोतरी के आधार पर गन्ने के एफआरपी में 40 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। अगले पेराई सीजन में कम से कम 9.5 फीसदी रिकवरी (रस की मात्रा) वाले गन्ने का न्यूनतम आधार मूल्य 210 रुपये क्विंटल और इससे अधिक रिकवरी वाले गन्ने का मूल्य प्रति 0.10 फीसदी रिकवरी पर 2.21 रुपये की दर से बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि चालू पेराई सीजन में गन्ने का एफआरपी 170 रुपये क्विंटल निर्धारित है। पिछले वर्ष सरकार ने एफआरपी में 17.24 फीसदी की बढ़ोतरी की थी।
गन्ने के एफआरपी में बढ़ोतरी का लाभ उन राज्यों के हजारों किसानों को मिल सकेगा, जिन राज्यों की सरकारें गन्ने का मूल्य (राज्य परामर्श मूल्य) निर्धारित नहीं करतीं। सहकारिता के जरिए राज्यों में होने वाली गन्ने की खरीद में चीनी मिलें एफआरपी की दर से किसानों को भुगतान करती हैं।
हालांकि अब किसानों की जागरूकता और मजबूत संगठन के चलते महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे सहकारिता के जरिए गन्ने की खरीद करने वाले राज्यों में भी गन्ने का दाम एफआरपी के बजाए अन्य राज्यों के एसएपी के आधार पर ही तय किया जाता है।