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प्रीमियम संस्थानों को बजट में मिला खूब पैसा

Sat, 02 Mar 2013 12:52 AM IST
नई दिल्ली/बृजेश सिंह
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वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने देश के प्रीमियम शिक्षण संस्थान माने जाने वाले आईआईटी, आईआईएम तथा आईआईएसईआर जैसे संस्थानों के विकास के लिए बजट में दिल खोलकर पैसा दिया है जबकि विश्वविद्यालय शिक्षा के लिए उन्होंने जो धनराशि दी है, वह काफी कम है।
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देश के आईआईटी संस्थानों में पूंजीगत निर्माण के लिए बजट में 1960 करोड़ रुपये मिले हैं। पिछले बजट में यह राशि शुरू में 960 करोड़ रुपये थी जिसे संशोधित बजट में बढ़ाकर 1178 करोड़ कर दिया गया था। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार नए आईआईटी संस्थानों के विकास के लिए बजट में इस बार बढ़ाकर धनराशि मिली है। इसी तरह भारतीय प्रबंध संस्थानों (आईआईएम) को इस बार पूंजीगत निर्माण के लिए कुल 263 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

पिछले साल आईआईएम को इस मद में केवल 68 करोड़ रुपये ही मिल सके थे। इस तरह पिछले साल की तुलना में यह धनराशि चार गुना से थोड़ा ही कम है। इसी तरह राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी) के लिए भी वित्त मंत्री ने नए निर्माण आदि कार्यों के मद में 890 करोड़ रुपये दिए। पिछले साल इस मद में एनआईटी संस्थानों को केवल 641 करोड़ मिले थे। दिल्ली स्थित योजना एवं वास्तुकला विद्यालय (स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर) के नए परिसर की स्थापना के लिए भी बजट में इस बार 63 करोड़ रुपये अलग से स्वीकृत किए गए।
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एसपीए स्कूल के विस्तार की योजना कई सालों से बजट के अभाव में लंबित चल रही थी। इसके अलावा इलाहाबाद, ग्वालियर, जबलपुर तथा कांचीपुरम् में स्थित ट्रिपल आईटी संस्थानों को भी पूंजीगत निर्माण के लिए 146 करोड़ का बजट में प्रावधान किया गया है। तकनीकी शिक्षा के लिहाज से उक्त सभी संस्थाओं को देश के प्रीमियम संस्थान का दर्जा हासिल है।

भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएसई) तथा विज्ञान शिक्षा एवं शोध संस्थान (आईआईएसईआर) राष्ट्रीय महत्व के संस्थान हैं। विज्ञान की शिक्षा के लिए देश के बेहतरीन संस्थान माने जाने वाले इन संस्थाओं के विकास के लिए इस साल 579 करोड़ रुपये आंवटित किए गए। दूसरी ओर देश में कुल 42 केंद्रीय विश्वविद्यालयों तथा 300 से भी अधिक राज्यों के विश्वविद्यालयों के पूंजीगत विकास के सिर्फ 3650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हाल ही में देश में नए खुले एक दर्जन केंद्रीय विश्वविद्यालयों की जरूरत को देखते हुए यह धनराशि बहुत ही कम है।
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