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गैस कीमतें बढ़ाने के खिलाफ बिजली उत्पादक कंपनियां

Tue, 08 Jul 2014 09:30 PM IST
नई दिल्ली /सुजय मेहदूदिया
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देश की अग्रणी बिजली उत्पादक कंपनियों ने गैस की कीमतों में किसी तरह की वृद्धि का विरोध किया है। कंपनियों ने ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयला को भेजे अपने प्रतिवेदन में कहा है कि देश में गैस की किल्लत के कारण गैस आधारित पावर प्लांटों पर गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में बदल जाने का खतरा मंडरा रहा है।
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इससे इन प्लांटों पर किए गए 1,20,000 लाख करोड़ रुपये के निवेश पर जोखिम बढ़ गया है। बिजली उत्पादक कंपनियों ने कहा है कि अगर चालू हो चुके गैस आधारित प्लांटों को चलाने के लिए 100 एमएमएससीएमडी गैस नहीं मुहैया कराई गई तो निवेश का बड़ा हिस्सा जोखिम की जद में होगा।

अपनी स्थिति बयान करते हुए गैस आधारित बिजली उत्पादकों ने कहा है कि प्लांटों को 70 से 75 प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) पर चलाने के लिए कुल 100 एमएमएससीएमडी गैस की जरूरत है, जबकि जनवरी 2014 में मात्र 24.03 एमएमएससीएमडी गैस की आपूर्ति की गई। गैस की इतनी कम आपूर्ति का नतीजा ग्रिड कनेक्टेड प्रोजेक्ट के लिए बेहद कम और जारी न रख पाले वाले पीएलएफ के रूप में सामने आया।
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जनवरी, 2014 में पीएलएफ मात्र 19 फीसदी रहा। बिजली उत्पादकों ने ऊर्जा मंत्री से गैस कीमतों के मामले को सक्रिय रूप से देखने का अनुरोध किया है, क्योंकि गैस की कीमतों में किसी तरह की वृद्धि से उत्पादन लागत बढ़ेगी और डिस्काम को बिजली के लिए ज्यादा भुगतान करना होगा।

इससे केंद्र सरकार द्वारा डिस्काम की वित्तीय सेहत को सुधारने के लिए शुरू की गई फाइनेंसियल रिस्ट्रक्चरिंग स्कीम से हुआ फायदा गैस की कीमत बढ़ने से बेकार चला जाएगा। उत्पादकों का कहना है कि सप्लाई के मौजूदा स्तर पर गैस की कीमत बढ़ने से डिस्काम को सालाना कम से कम 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। अगर कोयले से तुलना करें तो पावर सेक्टर के लिए गैस की कीमतें पहले से ही प्रतिस्पर्धी नही हैं। गैस कीमतें बढ़ने से डिस्काम कोयला आधारित प्लांटों से बिजली खरीदने को और ज्यादा प्राथमिकता देने लगेंगी।

बिजली उत्पादकों ने गैस कीमतें सिर्फ नए खोजे गए गैस फील्ड के लिए बढ़ाने का सुझाव देते हुए ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है, जिससे बढ़ी गैस कीमतें मौजूदा एपीएम और एनइएलपी फील्ड पर न लागू हों। बिजली उत्पादकों ने यह सुझाव भी दिया है कि गैस कीमतों की सीमा तय की जाए, जिससे कीमतें बहुत ज्यादा न बढ़ें।

कंपनियों ने कहा है कि जब 2009 में गैस कीमतें पांच वर्ष के लिए तय की गईं थीं तो इन कीमतों को कच्चे तेल की कीमतों से जोड़ा गया था और कच्चे तेल की कीमतों को 60 डॉलर प्रति बैरल पर कैप किया गया था। इसका नतीजा यह हुआ की गैस की कीमतें 4.2डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के अंदर रहीं।

उत्पादकों ने यह उदाहरण देते हुए अनुरोध किया है कि इसी तरह की सीमा नई गैस कीमतों के लिए तय की जाए, जिससे गैस आधारित बिजली की कीमतों में तेज और अचानक वृद्धि से बचा जा सके। पावर सेक्टर के लि गैस की जरूरतें पूरी करने के लिए उत्पादकों ने एलएनजी के साथ घरेलू गैस आपूर्ति बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया है।
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