पेट्रोल के बाद अब एलपीजी कीमतों पर भी सियासी खेल शुरू हो गया है। एलपीजी महंगा होने के बावजूद तेल कंपनियां गैर रियायती रसोई गैस सिलेंडरों की कीमतों में इजाफा नहीं कर रही हैं। रसोई गैस की गैर रियायती घरेलू सिलेंडर की कीमत तय करने का अधिकार तेल कंपनियों के पास होने के बावजूद सरकार के दबाव में उनके लिए दाम बढ़ाना मुश्किल हो रहा है।
यह लगातार दूसरा महीना है जब गैर रियायती घरेलू सिलेंडरों की कीमत तेल कंपनियों ने नहीं बढ़ाई है, जबकि व्यवसायिक और छूट प्राप्त श्रेणी के सिलेंडरों की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। सूत्रों की माने तो संसद का शीतकालीन सत्र जारी रहने और गुजरात के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर तेल कंपनियों पर गैर रियायती घरेलू एलपीजी के दाम नहीं बढ़ाने का दबाव है।
फिलहाल सरकार आम आदमी से जुड़े इस मुद्दे को हवा देकर विरोधी दलों को कोई मुद्दा नहीं देना चाहती है। एक प्रमुख सरकारी तेल कंपनी के अधिकारी ने कहा कि एलपीजी का आयात महंगा होने के बावजूद घरेलू गैर रियायती सिलेंडरों का दाम नहीं बढ़ाया जा रहा है।
अगर राजनीतिक कारणों से इनके दाम नहीं बढ़ाए गए तो इसका खामियाजा कंपनियों को उठाना होगा। दूसरी ओर, अभी तक यह भी तय नहीं हो सका है कि गैर रियायती सिलेंडरों को कम कीमत पर बेचने से होने वाले घाटे की भरपाई किस तरह हो सकेगी।
गौरतलब है कि पिछले माह घरेलू गैर रियायती सिलेंडरों के दाम 26 रुपये 50 पैसे प्रति सिलेंडर बढ़ाने के कुछ ही घंटों में इसे वापस ले लिया गया था। ऐसा हिमाचल प्रदेश और गुजरात चुनावों पर असर पड़ने की आशंका के मद्देनजर किया गया था। फिलहाल दिल्ली में घरेलू गैर रियायती सिलेंडर की कीमत 895 रुपये 50 पैसे प्रति सिलेंडर है। 1 दिसंबर को तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम व्यवसायिक सिलेंडर की कीमत 1551 रुपये प्रति सिलेंडर कर दी, जबकि छूट प्राप्त श्रेणी के गैर रियायती सिलेंडर का दाम 1105 रुपये हो गया है।