केंद्र में पूर्ण बहुमत वाली मोदी सरकार आने की उम्मीदों पर एग्जिट पोल की मुहर लगने के बाद नौकरशाही अपने-अपने महकमों के एजेंडे को भाजपाई रंग देने में जुट गई है।
केंद्र में पूर्ण बहुमत वाली मोदी सरकार आने की उम्मीदों पर एग्जिट पोल की मुहर लगने के बाद नौकरशाही अपने-अपने महकमों के एजेंडे को भाजपाई रंग देने में जुट गई है। जिस तरह तकरीबन सभी एग्जिट पोल ने एनडीए को 272 से ज्यादा सीटें मिलने का दावा किया है, उससे नई सरकार के लिए मंत्रालयों का एजेंडा तैयार कर रहे अफसरों को साफ संकेत मिल गया है।
ऐसे में केंद्र की सत्ता से यूपीए सरकार की विदाई के साथ-साथ उसकी कई फ्लैगशिप योजनाओं का चेहरा बदल सकता है। एफडीआई जैसे विवादित मुद्दों पर भी केंद्र सरकार का बदला हुआ रुख सामने आ सकता है।
सबसे ज्यादा बदलाव यूपीए की उन योजनाओं में हो सकता है, जो काफी धन खर्च होने के बावजूद कोई खास छाप नहीं छोड़ पाई हैं। एग्जिट पोल के संकेत को भांपते हुए कई अफसरों ने भाजपा के घोषणा-पत्र को ध्यान में रखते हुए अपने विभाग का एजेंडा तैयार करना शुरू कर दिया है।
आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय में सबको आवास मुहैया कराने के भाजपा के चुनावी वादे के मद्देनजर राजीव आवास योजना के दायरे को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछले कई साल से आवास से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े अनुभवी अधिकारी राजीव आवास योजना में व्यापक सुधार का खाका पेश करने की तैयारी कर रहे हैं।
कुछ ऐसी ही कोशिश सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में भी चल रही है। मोदी के विजन को भांपते हुए मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारी उत्तर-पूर्व भारत को म्यांमार और थाईलैंड जैसे देशों से जोड़ने वाले एशियन हाईवे की योजना जोर-शोर से पेश करने की तैयारी में जुटे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में जिस तरह स्वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग की योजना आगे बढ़ी, उसी तर्ज पर पर्वतीय राज्यों में हाईवे का जाल बिछाने का रोडमैप तैयार हो चुका है।