मौजूदा पंचवर्षीय योजना(2012-17) के लिए 8.2 फीसदी विकास दर को योजना आयोग ने महत्वाकांक्षी बताया है। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के मुताबिक बारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान उम्मीद से कम विकास दर रहने अनुमान है।
माना जा रहा है कि बारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान देश की सालाना औसत विकास दर करीब 8 फीसदी रह सकती है। बृहस्पतिवार को होने वाली राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की बैठक पूर्व संवाददाताओं से चर्चा करते हुए अहलूवालिया ने यह संभावना जाहिर की है।
योजना आयोग ने दूसरी दफा पंचवर्षीय योजना के अनुमान में संशोधन कर देश की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को बयान कर दिया है। उल्लेखनीय है कि पहले पहल आयोग ने बारहवीं पंचवर्षीय योजना के एप्रोच पेपर में वार्षिक औसत विकास दर नौ फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। आयोग ने सितंबर 2012 में इस लक्ष्य को संशोधित कर 8.2 फीसदी कर दिया था। अब इसे और कम कर 8 फीसदी विकास दर का अनुमान लगाया जा रहा है।
विकास दर में गिरावट के अनुमान पर सफाई देते हुए अहलूवालिया ने कहा कि पंचवर्षीय योजना के एप्रोच पेपर को पिछले साल एनडीसी से मिली मंजूरी के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में काफी बदलाव आए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि विकास दर में कमी का मुद्दा कल एनडीसी के समक्ष रखा जाएगा। मालूम हो कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कल होने वाली एनडीसी की बैठक सभी कैबिनेट मंत्री, तमाम राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र व राज्य के आला अधिकारी शामिल होंगे।
उल्लेखनीय है कि ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के तहत देश की औसत वार्षिक विकास 7.9 फीसदी रही थी। जबकि बारहवीं पंचवर्षीय योजना के पहले वर्ष (वित्त वर्ष 2012-13) में विकास दर 5.7-5.9 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है। अगर यह अनुमान सही हो जाता है तो चालू वित्त वर्ष में विकास दर पिछले दस वर्षों के न्यूनतम स्तर पर आंकी जाएगी।