योजना आयोग ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के ‘गुजरात मॉडल’ की सराहना की है। योजना आयोग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि गुजरात उन शीर्ष राज्यों में से है, जहां कारोबारी माहौल काफी बेहतर है। इससे पहले, वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) की रिपोर्ट में भी गुजरात मॉडल की सराहना की गई थी।
योजना आयोग द्वारा प्रायोजित डेलॉयट के अध्ययन के मुताबिक गुजरात उन शीर्ष राज्यों में हैं, जहां निर्माण के क्षेत्र में कारोबारी नियमन का बेहतर वातावरण है। हालांकि, इस अध्ययन में राज्यों को कोई रैंक नहीं दी गई है।
बल्कि इन्हें विभिन्न मानदंडों के अनुसार तीन श्रेणियों शीर्ष, मध्यम और निचली में वर्गीकृत किया गया है। जिन मानदंडों के आधार पर श्रेणियों का वर्गीकरण किया गया है, उसमें वित्त, कर एवं श्रम कानून अनुपालन, ढांचागत एवं उपयोगी कार्यों से जुड़ी मंजूरियां और पर्यावरण अनुमति शामिल है।
शीर्ष श्रेणी में शुमार किए गए आठ राज्यों में गुजरात के साथ-साथ भाजपा शासित मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ भी शामिल हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, हरियाणा, केरल, तमिलनाडु और ओडिशा ने भी शीर्ष श्रेणी में स्थान बनाया है। हालांकि, श्रम कानूनों के अनुपालन के मामले में गुजरात का ट्रैक रिकॉर्ड बहुत बेहतर नहीं है।
डेलॉयट के अध्ययन के मुताबिक श्रम कानून के मामले में गुजरात निचली श्रेणी में है। वहीं, पर्यावरण मंजूरी को लेकर गुजरात मध्यम श्रेणी में है। यह अध्ययन सभी 28 राज्यों में पांच माह से अधिक समय में कराए गए। जिसकी शुरुआत सितंबर 2013 में की गई थी।
अध्ययन की रेटिंग के मुताबिक मध्यम श्रेणी में आने वाले राज्यों में बिहार, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। जबकि, निचली श्रेणी में अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, जम्मू एंड कश्मीर, झारखंड, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम और त्रिपुरा को रखा गया है।
इससे पहले, डीआईपीपी के अध्ययन में, जिसे एक्सेंचर ने कराया था, कहा गया था कि भूमि अधिग्रहण के मामले में गुजरात औद्योगिक विकास निगम का मॉडल बेहद सरल है।