पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने पेट्रोलियम मंत्रालय को डीलरों के कमीशन बढ़ाने की छूट दे दी तो आम आदमी पर एक बार फिर पेट्रोल, डीजल की बढ़ी कीमतों का बोझ पड़ सकता है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने चुनाव आयोग से त्योहारी मौसम में डीलरों के कमीशन बढ़ाने की अनुमति मांगी है। मंत्रालय को इसकी अनुमति मिलती है तो तेल कंपनियां ईंधन की खुदरा कीमतों में आगामी इजाफे के साथ डीलर कमीशन का बोझ भी उपभोक्ताओं पर डालेगी।
मंत्रालय ने चुनाव आयोग से कहा है कि डीलरों का कमीशन बढ़ाने का प्रस्ताव नया नहीं है। यह नियमित प्रक्रिया में है। इसलिए उन्हें कमीशन बढ़ाने की मंजूरी मिलनी चाहिए।
फेडरेशन ऑफ पेट्रोलियम ट्रेडर्स के महासचिव अजय बंसल ने बताया कि उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली से इस बाबत मुलाकात की है।
उन्हें यह बताया गया कि कई दफा पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के बावजूद डीलरों के कमीशन नहीं बढ़े हैं। इसलिए पेट्रोल पर 45 पैसा प्रति लीटर और डीजल पर 27 पैसा प्रति लीटर दाम बढ़ाने की मांग की जा रही है।
हालांकि मंत्रालय की ओर से कमीशन की प्रस्तावित दर पर सहमति नहीं जताई गई है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग से कमीशन बढ़ाने की अनुमति मिलने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय नई दर का खुलासा करेगा।
जानकारों का मानना है कि कमीशन बढ़ने से तेल कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन कम हो सकता है। इससे पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ने की आशंका बढ़ेगी।
ऐसे में तेल कंपनियां खुदरा कीमतों में इजाफा कर बढ़े कमीशन का बोझ आम आदमी पर डाल सकती हैं। मौजूदा समय में उन्हें पेट्रोल पर 1 रुपये 74 पैसा और डीजल पर 1 रुपये 07 पैसा प्रति लीटर कमीशन मिल रहा है।