डॉलर के मुकाबले रुपए में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज होने से तेल कंपनियों के बिगड़ते आर्थिक स्वास्थ्य से परेशान पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री पी. चिदंबरम से मुलाकात की।
मोइली ने सीरिया संकट और कच्चे तेल का आयात बिल बढ़ने से तेल कंपनियों की बढ़ती अंडर रिकवरी का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री से करीब आधे घंटे तक विचार विमर्श किया।
हालांकि उन्होंने हाल-फिलहाल में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की आशंका को नकार दिया है। लेकिन यह जरूर कहा है कि वे सरकार के बढ़ते चालू खाता घाटे को कम करने में सहयोग देना चाहते हैं।
बैठक के दौरान डीजल के दाम में 50 पैसे प्रति लीटर की जगह एकमुश्त 3-4 रुपए बढ़ाने और कर कटौती को लेकर भी बातचीत हुई।
मोइली ने कहा कि अर्थव्यवस्था की टेंशन को कम करने के लिए सभी प्रयासरत हैं। इसलिए हमने ऊर्जा की बचत और ईंधन की खपत कम करने को लेकर गंभीर चर्चा की है।
उन्होंने कहा कि पिछले माह 1.23 लाख करोड़ रुपए की अंडर रिकवरी का अनुमान लगाया गया था, जो कि अब इससे कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है। इस मुद्दे पर भी वित्त मंत्री से बातचीत हुई है।
माना जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र के खत्म होते ही सरकार ईंधनों के दाम बढ़ाने का निर्णय ले सकती है। दरअसल सालभर में 20 फीसदी तक रुपए की कीमत घटने और कच्चे तेल की कीमत दो वर्ष के उच्चतम स्तर तक पहुंच जाने का सर्वाधिक असर सब्सिडी प्राप्त ईंधनों पर हो रहा है।
मौजूदा स्थिति में डीजल और रसोई गैस की बिक्री पर तेल कंपनियों का सालाना नुकसान 1.23 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 1.4 लाख करोड़ रुपए होने की आशंका है।
इस वजह से तेल कंपनियां पेट्रोलियम मंत्रालय पर डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ाने का दबाव बढ़ा रही हैं। अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर सरकार को इस घाटे की भरपाई करनी होगी। इसलिए यह संभावना है कि सरकार डीजल और एलपीजी कीमतों में एकमुश्त वृद्धि का निर्णय ले सकती है।
डीजल बिक्री पर तेल कंपनियों को फिलहाल 10.22 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। जो कि मई में तीन रुपए प्रति लीटर से भी कम था। जबकि किरोसिन पर 33.54 रुपए प्रति लीटर और रसोई गैस पर 412 रुपए प्रति सिलेंडर का घाटा दर्ज किया गया है।