जिन दिन लोकसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलने का ऐलान हुआ, वित्त मंत्रालय आयकर विभाग के अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में जुटा हुआ था।
गत 16 मई को आयकर विभाग में कमिश्नर या निदेशक रैंक के 47 अफसरों सहित करीब 200 अफसरों को नई पोस्टिंग दी। यूपीए सरकार के आखिरी दिनों में हुए इस फैसले को लेकर राजनीति गरमाने लगी है।
भारतीय राजस्व सेवा के पूर्व अधिकारी और भाजपा सांसद उदित राज ने इस मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
किसने किया ये फैसला सामने आना चाहिए?
उदित राज का कहना है कि यूपीए सरकार की विदाई तय होने के दिन इतने बड़े पैमाने पर तबादले किसने कराए यह सामने आना चाहिए। इस मामले में लिप्त अधिकारियों को कतई बक्शा नहीं जाएगा।
वह नई सरकार का गठन होते ही इस मामले को प्रमुखता से उठाएंगे। गौरतलब है कि गत 16 मई को वित्त मंत्रालय ने आयकर आयुक्त या निदेशक स्तर के 47 अफसरों की पोस्टिंग के आदेश जारी किए थे।
इनके अलावा संयुक्त आयुक्त या संयुक्त निदेशक स्तर के 148 अधिकारियों को भी नई पोस्टिंग दी गई।
यूपीए सरकार के आखिरी दिनों में हुआ फैसला
यूपीए सरकार के आखिरी दिनों में ट्रांसफर व प्रमोशन को लेकर वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग और सीबीडीटी व सीबीईटी के बीच भी मतभेद उभर रहे हैं।
वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्र बताते हैं कि नई सरकार आने से पहले दोनों बोर्ड ट्रांसफर व प्रमोशन से बचना चाहते थे, लेकिन वित्त मंत्रालय के आला अधिकारियों के दबाव में 18 मई को चुनाव आचार संहिता हटने से पहले ही बड़े पैमाने पर पोस्टिंग देने का फैसला किया गया।