पेंशनधारकों के लिए एक खुशखबरी है। संसदीय समिति ने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि पेंशनधारकों को पेंशन के रूप में कम से कम 3 हजार रुपए दिए जाने चाहिए।
राज्ससभा सांसद भगत सिंह कोश्यारी की अध्यक्षता में बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।
समिति ने प्रस्ताव दिया है कि मासिक पेंशन 3,000 रुपए सुनिश्चित करने के लिए सरकार अपनी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 8.31 फीसदी करें, जो फिलहाल 1.16 फीसदी है।
समिति ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के प्रस्ताव से एक कदम आगे बढ़ते हुए रिटायर्ड लोगों को आर्थिक सुरक्षा दिए जाने का प्रस्ताव सामने रखा है।
संसदीय समिति के मुताबिक अगर सरकार ईपीएफओ में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 8.33 फीसदी करती है, तो देश में 55 लाख लोगों को फायदा होगा।
इससे पहले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने केंद्र सरकार से पेंशनधारकों को न्यूनतम 1,000 रुपए मासिक देने के लिए पेंशन योजना ईपीएस-95 में अपना योगदान बढ़ाने का आग्रह किया था।
इस योजना में सरकार की मौजूदा हिस्सेदारी 1.16 फीसदी है, जबकि ईपीएफओ ने इसे बढ़ाकर 1.79 फीसदी करने की वकालत की है।
ईपीएफओ ने इस संदर्भ में श्रम मंत्रालय को एक पत्र लिखकर कहा है कि सभी पेंशनधारकों को न्यूनतम 1,000 रुपए मासिक सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारी पेंशन योजना-1995 में सरकार की हिस्सेदारी बढ़ाकर 1.79 फीसदी करने का मजबूत केस बनता है।
संगठन के अनुसार, सभी कैटेगरी के पेंशनधारकों को न्यूनतम मासिक पेंशन 1,000 रुपए प्रतिमाह सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों के मूल वेतन का 0.63 फीसदी अतिरिक्त योगदान जरूरी है। अब श्रम मंत्रालय इस मुद्दे को वित्त मंत्रालय के सामने उठाएगा।
मौजूदा समय में केंद्र सरकार कर्मचारियों के मूल वेतन (मूल वेतन प्लस महंगाई भत्ता) का 1.16 फीसदी ईपीएस-95 में देती है।
वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान सरकार ने इस कोष में 1,900 करोड़ रुपए का योगदान दिया था।
अनुमान के अनुसार, यदि केंद्र अपनी मौजूदा हिस्सेदारी को बढ़ाकर सिर्फ 1.79 फीसदी करने का फैसला करता है, तो उसे चालू वित्त वर्ष में 750 से 800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ उठाना होगा।