बैंगलोर की एक जेल से कैदी जब चाहे शाम को बाहर घूमते हैं या वीकेंड का लुत्फ उठाते हैं। फिर वापस आकर जेल में बंद हो जाते हैं। कैदियों को इसके लिए न केवल सुरक्षाकर्मियों का भरोसा जीतना पड़ता है बल्कि पुलिसकर्मियों को रिश्वत भी देनी पड़ती है।
टीओआई की खबर के मुताबिक एक राष्ट्रीय पार्टी के वरिष्ठ नेता साल 2012 में 83 दिनों के लिए बैंगलोर के पराप्पना अग्रहारा सेल में बंद थे। तब उन्होंने एक दिन घर पर रात का खाना खाया और अगले दिन तड़के सुबह वापस सेल में आ गए।
दो से पांच हजार देते हैं कैदी
पूर्व मंत्री अकेले नहीं हैं। उनकी तरह इस सुविधा का फायदा और भी कैदी उठा रहे हैं। यह कैदियों के लिए जेल के ऊबाउ दिनों से ब्रेक मिलने जैसा है। इसके लिए पुलिसकर्मियों को दो से पांच हजार रुपए तक देने पड़ते हैं।
जिस कैदी को बाहर जाना होता है उसके साथ दो पुलिसकर्मी भी जाते हैं। अगर कैदी पुलिसवालों को भरोसा हासिल कर लेता है तो उसे अकेले जाने की छूट भी मिल सकती है।
जबकि नियमों के अनुसार कोई भी सजा भुगत रहा कैदी केवल पैरोल पर ही 30 से 60 दिनों के लिए बाहर जा सकता है।
जिस राजनेता को परिवार के साथ रात बिताने के लिए भेजा गया उनसे चार लाख रुपए से ज्यादा वसूले गए थे।
पहले घरवाले करते हैं पुलिस से संपर्क
हाल ही में बैंगलोर जेल से भागे रेप के कई मामलों में दोषी जयशंकर ने भी बाहर घूमने जाने देने की कोशिश की थी लेकिन उसे मना कर दिया गया।
कैदियों को यह सुविधा आसानी से नहीं दी जाती। कैदी के घरवालों को पुलिस को भरोसा दिलाना पड़ता है कि कैदी बाहर जाने के बाद वापस लौट आएगा।
साथ ही जब किसी कैदी को विक्टोरिया अस्पताल के जेल वॉर्ड में रखा जाता है तो उसे अपनी निगरानी करने वाले पुलिसकर्मियों को मसाला डोसा भी खिलाना पड़ता है।