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बजट को पार कर गए सरकार के खर्चे

Sat, 08 Dec 2012 09:36 AM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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केंद्र सरकार के खर्चे बजट के बाहर जा रहे हैं। शुक्रवार को वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने संसद से चालू वित्त वर्ष के लिए तय बजट के अलावा करीब 30,804 करोड़ रुपये के शुद्ध अतिरिक्त व्यय की अनुमति मांगी है। पेट्रोलियम सब्सिडी के बढ़ते बोझ और एयर इंडिया को दी जा रही आर्थिक मदद की वजह से सरकार को बजट के दायरे से बाहर जाकर यह खर्च करना पड़ रहा है।
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फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार इस अतिरिक्त व्यय का इंतजाम कैसे करेगी। वित्त मंत्री ने बाजार से उधारी बढ़ाने की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि इस अतिरिक्त व्यय को सरकार अपनी मौजूदा उधार सीमा के अंदर समायोजित कर लेगी। राजकोषीय घाटे को कम करने की कोशिश में जुटी सरकार की ओर से इस साल अतिरिक्त व्यय की यह पहली मांग है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने तीन बार अतिरिक्त व्यय की मांग रखी थी।

इस अतिरिक्त व्यय में से 28,500 करोड़ रुपये पेट्रोलियम सब्सिडी पर खर्च होंगे जबकि घाटे में चल रही एयर इंडिया को दो हजार रुपये की मदद दी जाएगी। इसके अलावा 300 करोड़ रुपये सरकार अन्य मदों में खर्च करेगी। बढ़ते खर्च और आर्थिक मंद गति के चलते राजस्व में उम्मीद से कम बढ़ोतरी की वजह से राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण रखना सरकार के लिए मुश्किल होता जा रहा है।
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आमदनी और खर्चों के बीच बढ़ते अंतर को पाटने के लिए सरकार चालू वित्त वर्ष में करीब 5.7 लाख करोड़ रुपये बाजार से बतौर पर कर्ज लेगी। हालांकि वित्त मंत्री ने बाजार उधारी को अनुमानित सीमा के अंदर रखने का दावा किया है लेकिन राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.3 फीसदी तक सीमित रखना मुश्किल दिख रहा है। पहली छमाही में सरकार 3.7 लाख करोड़ का कर्ज ले चुकी है और राजकोषीय घाटा भी 3.37 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
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