यदि आप अपनी इकाई का आधुनिकीकरण करना चाहते हैं, तो उसके लिए आपको पूंजी की जरूरत पड़ेगी।
बैंक इसके लिए आपको कर्ज देते हैं। यदि यह पूंजी आपकी जरूरत के विभिन्न चरणों में मिले, और उसके लिए ब्याज भी चरणबद्ध तरीके से चुकाना पड़े, तो यह छोटे कारोबारियों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
छोटे और मझोले कारोबारियों को इस तरह की जरूरत के लिए भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) कर्ज दे रहा है।
किसे मिलता है लाभ
छोटे और मझोले उपक्रम वर्ग के तहत आने वाले कारोबारी सिडबी की फ्लेक्सिबल असिसटेंस फॉर कैपिटल एक्सपेंडिचर स्कीम का लाभ उठा सकते हैं। इस स्कीम का लाभ कारोबारी नई इकाई के साथ-साथ मौजूदा इकाई के विस्तार के लिए भी उठा सकते हैं।
किसलिए ले सकते हैं कर्ज
जो कारोबारी अपनी इकाई का आधुनिकीकरण करना चाहते हैं, या फिर विश्वस्तरीय विनिर्माण इकाई बनाना चाहते हैं, उसके तहत होने वाले निवेश के लिए कर्ज ले सकते हैं। जमीन और इमारत आदि के लिए बड़ी मात्रा में निवेश की जरूरत पड़ती है।
ऐसे में पूरे निवेश में लगने वाली पूंजी को विस्तार के साथ-साथ विभिन्न चरणों में प्राप्त कर सकते हैं। खास बात यह है कि स्कीम के तहत अलग-अलग समय में लिए गए कर्ज की भुगतान अवधि भी विभिन्न चरणों के आधार पर तय होती है। साथ ही ब्याज दर का निर्धारण भी अलग-अलग अवधि के आधार पर होता। जैसे कि भूमि के लिए अलग, इमारत के लिए अलग अवधि और ब्याज दर तय होगी।
किन बातों का रखें ध्यान
इस स्कीम का लाभ उठाने के लिए जरूरी है कि कारोबारी का रिकॉर्ड अच्छा हो। ऐसे में जरूरी है कि कारोबारी द्वारा पहले लिए गए कर्ज पर किसी तरह का डिफॉल्ट न हो। यदि वह नया कारोबारी है, तो उसे अपने प्रोजेक्ट की प्रासंगिकता बेहतर रूप से साबित करनी होगी।
कर्ज के लिए अवधि
स्कीम के तहत गैर गतिशील संपत्ति के लिए अधिकतम 10 साल का कर्ज और फिक्स संपत्ति के लिए अधिकतम सात साल के लिए कर्ज मिलता है। ब्याज दर उपक्रम की रेटिंग और कर्ज की अवधि के आधार पर तय होती है।