कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इशारे पर भले ही कांग्रेस शासित प्रदेशों में सालाना नौ रियायती सिलेंडर मुहैया कराने का ऐलान कर दिया गया हो, लेकिन अभी तक इसकी अधिसूचना इन राज्यों ने जारी नहीं की है। तेल कंपनियों को भी इस बाबत पेट्रोलियम मंत्रालय से कोई निर्देश नहीं मिला है। इसलिए सरकारी तेल कंपनियों ने किसी भी राज्य में फिलहाल छह से अधिक सिलेंडर मुहैया नहीं कराने का फैसला लिया है।
यह भी साफ हो गया है कि एक साल में छह से ज्यादा सिलेंडर मुहैया कराने वाले राज्यों के लिए तेल कंपनियां अपनी ओर से कोई योजना तैयार नहीं करेंगी। पेट्रोलियम मंत्रालय और राज्य सरकारें मिलकर इसके लिए विशेष मैकेनिज्म तैयार करेगी और मंत्रालय के आदेश पर कंपनियां राज्यों में रसोई गैस सिलेंडर का वितरण करेंगी।
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि कांग्रेस शासित राज्यों में छह से अधिक सब्सिडी प्राप्त सिलेंडर मुहैया कराने के लिए वे अपनी ओर से कोई विकल्प तैयार नहीं करेगी, बल्कि इस बाबत सरकारी आदेश का पालन किया जाएगा। दरअसल एलपीजी सिलेंडर पर कैपिंग के बाद सभी राज्यों में सालाना रियायती सिलेंडरों की संख्या अलग-अलग हो गई है।
ऐसे में यह साफ है कि छह रियायती सिलेंडर के सब्सिडी का बोझ केंद्र सरकार वहन करेगी, लेकिन इससे ज्यादा रियायती सिलेंडरों की बिक्री पर आने वाले बोझ को राज्यों को वहन करना है। राज्यों ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वे किस तरीके से अतिरिक्त सब्सिडी वाले सिलेंडर के बदले में तेल कंपनियों की भरपाई करेंगे।
एक अधिकारी ने कहा कि राज्य अगर ग्राहकों के खाते में सीधे सब्सिडी की रकम जमा करा दें तो तेल कंपनियां समान कीमत पर राज्यों को नौ सिलेंडर मुहैया करा सकेंगी। हालांकि राज्यों को इस बारे में अंतिम फैसला लेना है। गौरतलब है कि ज्यादातर कांग्रेस शासित राज्यों ने बीपीएल परिवारों को सालाना नौ सिलेंडर उपलब्ध कराने का ऐलान किया है। हालांकि कांग्रेस के सहयोगी दलों ने इस बाबत अपने पत्ते नहीं खोले हैं।