क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के विलय की प्रक्रिया अटक गई है। कई राज्यों ने अभी भी विलय के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दिया है। सूत्रों के अनुसार तमिलनाडु, हरियाणा, राजस्थान, केरल, पश्चिम बंगाल ने अभी तक विलय की मंजूरी नहीं दी है। जिसके वजह से इन राज्यों में आरआरबी की विलय प्रक्रिया नहीं शुरू हो पाई है।
सूत्रों के अनुसार आरआरबी के प्रमुखों के साथ वित्त मंत्री की बैठक भी आठ जनवरी को होने जा रही है। जिसके तहत विलय के अलावा उनके कार्यों की समीक्षा वित्त मंत्री करेंगे। विलय की प्रक्रिया में देरी पर अधिकारी ने बताया कि अभी तक उत्तर प्रदेश के एक, मध्य प्रदेश के तीन, बिहार के एक, कर्नाटक के एक, उड़ीसा के एक और उत्तराखंड के एक आरआरबी का विलय हो चुका है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार की मंजूरी के बाद बची आरआरबी के संबंध में जल्द ही अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। जिसके बाद प्रदेश में कुल छह आरआरबी रह जाएंगे।
इसके पहले सरकार पहले चरण के विलय प्रक्रिया में साल 2005-2007 के बीच आरआरबी की संख्या 196 से घटाकर 82 कर चुकी है। दूसरे चरण की प्रक्रिया में सरकार छोटे और वित्तीय रुप से कमजोर आरआरबी का बड़ी आरआरबी में विलय कर रही है। विलय प्रक्रिया पूरी कर सरकार वित्तीय समावेशन कार्यक्रम को जहां मजबूत करना चाहती है वहीं, आरआरबी का आधुनिकीकरण भी करना चाहती है। इसके सीबीएस, एटीएम आदि लगाने की योजना है।
अधिकारी के अनुसार, आरआरबी में राज्यों की 15 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में विलय के लिए उनकी मंजूरी लेना आवश्यक है। जिन राज्यों की मंजूरी अभी तक नहीं मिल पाई है, उनमें विलय की प्रक्रिया में देरी हो रही है। सरकार की योजना 31 मार्च 2013 तक देश में मौजूदा 82 आरआरबी की संख्या को घटाकर 46 करने की है। साथ ही, साल 2013 तक सभी आरआरबी को अपनी शाखाओं में 10 फीसदी की बढ़ोतरी करने के भी निर्देश वित्त मंत्रालय दे चुका है। देश में इस समय 16 हजार से ज्यादा आरआरबी के कर्मचारी हैं।