वैश्विक स्तर पर छायी आर्थिक मंदी धीरे-धीरे छंटने का फायदा घरेलू फूलों के कारोबार को मिल सकता है। उम्मीद की जा रही है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान घरेलू फूलों का निर्यात चार सौ करोड़ रुपये के स्तर को पार कर जाएगा। निर्यातकों का कहना है कि मात्रात्मक निर्यात में मामूली बढ़त हो सकती है जबकि कीमत के मामले कारोबार काफी अच्छा रहने की संभावना है।
इंडियन फ्लॉवर्स एंड ऑरनामेंटल प्लांट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आईफ्लोर) के अध्यक्ष एस जफर नकवी के मुताबिक वैश्विक स्तर पर फूलों की मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि इस बढ़ती मांग का भारतीय निर्यातक ज्यादा फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। वर्ष 2006-07 तक वैश्विक बाजार में भारतीय फूलों का निर्यात सर्वाधिक बेहतर रहा।
इस वर्ष लगभग 653 करोड़ रुपये मूल्य के फूलों का निर्यात हुआ था। हालांकि इसके अगले ही वर्ष निर्यात घटकर 340 करोड़ रुपये रह गया। तब से लेकर पिछले वित्त वर्ष तक निर्यात स्थिर नहीं है। पिछले वित्त वर्ष में निर्यात 365 करोड़ रुपये था। लेकिन इस वर्ष महंगे डॉलर के कारण उम्मीद है कि मूल्य के आधार पर फूलों का निर्यात 400 करोड़ रुपये के स्तर को पार कर सकता है।
नकवी का कहना है कि वैश्विक स्तर पर फूल निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन इसका लाभ लेने के लिए किसानों को परंपरागत तरीके को छोड़कर आधुनिक ढंग से खेती करनी होगी। चीन के किसान इस मामले में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। वैश्विक कारोबार में भी चीन की हिस्सेदारी बढ़ रही है। हालांकि वैश्विक स्तर पर अपेक्षित विकास हासिल न होने के बावजूद एक दशक में फूलों का घरेलू बाजार काफी विकसित हुआ है। सजावट, पूजा, औषधि उपयोग से हटकर गिफ्ट और स्वागत में फूलों के देने का चलन बढ़ने से ऐसी स्थित बनी है।
घरेलू और वैश्विक स्तर पर फूलों के बढ़ते बाजार का लाभ दिलाने के लिए आईफ्लोरा प्रति वर्ष देश में अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का आयोजन करता है। इस वर्ष भी 13 से 23 जनवरी को इसका आयोजन दिल्ली में किया जा रहा है। दिल्ली में होने वाले पांचवें फ्लोरा-2013 एक्सपो में फूलों से जुड़े सैकड़ों किसान, कारोबारी, निर्यात एवं आयातक फर्मों के प्रतिनिधियों के साथ ही सरकारी एवं सहकारी संस्थाएं हिस्सा लेंगी। एक दर्जन से ज्यादा विदेशी कंपनियां भी इस मेले में शिरकत करेंगी।