बीमा नियामक इरडा हेल्थ इंश्योरेंस में सस्ते उत्पाद लाने की कवायद कर रहा है। नियामक इसके लिए अस्पतालों के मनमाने इलाज खर्च पर लगाम कसने की कार्यवाही शुरू कर चुका है। इसके तहत अस्पतालों, स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर खर्च के मानक तय किए जा सकते हैं।
सोमवार को सीआईआई द्वारा आयोजित हेल्थ इंश्योरेंस सम्मेलन में इरडा के सदस्य एम. रामप्रसाद ने कहा कि अफोर्डेबल बीमा उत्पाद लाने के लिए यह बहुत जरूरी है कि स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले इलाज खर्च के लिए एक स्टैण्डर्ड प्रोटोकॉल बने। उन्होंने कहा कि विभिन्न बीमारियों के इलाज पर होने वाले खर्च का मानकीकरण होना चाहिए। जिन पर होने वाले खर्च को यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के तहत शामिल करने की जरूरत है।
रामप्रसाद ने कहा कि इरडा इस दिशा में गंभीरता से सभी पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस के बढ़ते दायरे को देखते हुए उस पर लिए जाने वाले क्लेम की प्रक्रिया को आसान और तेज करने पर लगातार कदम उठा रहा है।
इसके पहले बीमा नियामक इरडा ने अस्पतालों द्वारा इलाज पर ली जाने वाली फीस आदि पर नजर रखने के लिए अस्पतालों को यूनीक कोड देने की भी कवायद शुरू की है। इरडा ने इसके तहत पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया है। इस योजना के तहत इरडा अस्पतालों द्वारा मरीजों से लिए जाने वाले इलाज खर्च पर भी नजर रखना चाहता है।