यूपीए-2 सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिरी व अंतरिम बजट में रक्षा मंत्रालय को 224000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। रक्षा खर्च में कटौती और सैन्य उपकरणों के स्वदेश में ही निर्माण की वकालत कर रही सरकार ने रक्षा बजट में पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी की बढ़ोतरी की है।
सरकार का दावा है कि चीन और पाकिस्तान के खतरे के मद्देनजर सेना के आधुनिकीकरण और हथियारों की खरीदारी से फिलहाल कोई समझौता नहीं किया जा रहा। जबकि रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की चौतरफा सामरिक चुनौतियों के मद्देनजर बजट में यह इजाफा ऊंट के मुंह में जीरे की तरह है।
चीन और पाकिस्तान की तरफ से बढ़ती चुनौती
रक्षा विशेषज्ञ पूर्व ब्रिगेडियर गुरमीत कंवर ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि चीन और पाकिस्तान की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए सिर्फ यही बजट नहीं, बल्कि पिछले रक्षा बजट भी नाकाफी साबित हुए।
गुरमीत के मुताबिक 10 फीसदी की बढ़ोतरी को बढ़ोतरी माना ही नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 8-9 प्रतिशत की मुद्रास्फीति की सूरत में रक्षा के लिए किया जाने वाला यह खर्च कोई मायने नहीं रखता। यह बढ़ोतरी पिछले साल की वृद्धि के मुकाबले चार फीसदी कम है।
कॉम्बैट एयरक्रॉफ्ट से सेना को मिलेगी मजबूती
अंतरिम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि पिछले बजट में रक्षा मंत्रालय को 203672 करोड़ रुपये दिए गए थे जिसका इस महीने की शुरुआत तक 82 फीसदी खर्च किया जा चुका है। इसमें 80,000 करोड़ रुपये सेना के आधुनिकीकरण पर खर्च किए जाने थे।
गौरतलब है कि रक्षा बजट में यह बढ़ोतरी उस वक्त की गई है जब रक्षा मंत्रालय कम से कम दस बड़े रक्षा सौदों में आखिरी फैसले के मुकाम पर है।
रक्षा मंत्रालय रूस के साथ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हासिल करने के लिए समझौते के अंतिम चरण में है। इस योजना पर अगले दस साल में 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च होने हैं।
हजारों करोड़ रुपये के 126 मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की खरीदारी पर रक्षा मंत्रालय कुछ ही महीनों में फैसला लेने वाला है। इसी तरह 22 अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर, 15 हैवीलिफ्ट चिनहुक हेलीकॉप्टर पर भी जल्द फैसला होने वाला है।
अगस्ता वेस्टलैंड के साथ वीवीआईपी हेलीकॉप्टर का सौदा रद्द होने के बाद ऐसा हेलीकॉप्टर हासिल करना भी सरकार की वरीयता में है। उधर, चीन की ओर से आए दिन बढती घुसपैठ की घटनाओं के मद्देनजर गठित की जा रही सेना की खास और अतिगोपनीय माउंटेन स्ट्राइक टुकड़ियों को मूर्त रूप देने के लिए भी 64000 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। ऐसे में यह बजट पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।