चीन की मुद्रा युआन के अवमूल्यन ने उत्तर भारत के उद्योग-कारोबार की चिंता बढ़ा दी है। आगरा-कानपुर के सालाना 8 हजार करोड़ के चमड़ा उद्योग में प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी वहीं मुजफ्फरनगर के इस्पात उद्योग से जुड़े 60 हजार लोग अभी से बेचैन हैं।
लुधियाना के निर्यातकों के सामने भी बड़ी चुनौती है। कारोबारियों का मानना है कि सीधा असर निर्यात की जाने वाली वस्तुओं पर पड़ेगा। कानपुर से 3 और आगरा से 5 हजार करोड़ का चमड़े का कारोबार होता है।
चमड़ा कारोबारी और इराकी चर्म निर्यात परिषद के सदस्य असद कमाल मानते हैं कि चीन यदि अपने उत्पादों की कीमत बढ़ा देता है, तो यह हमारे लिए घाटे का सौदा हो सकता है।
जूता उद्योग पर पड़ेगा असर
इसलिए जब तक वस्तुओं के दाम वहां पर नहीं बढ़ते हैं, हमें उसका फायदा उठाना चाहिए। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान वाली बात यह है कि गुणवत्ता वाले उत्पाद को लेकर लोगों में असमंजस रहेगा।
आगरा फुटवियर मैन्यूफैक्चर्स एंड एक्सपोर्टस चैंबर के अध्यक्ष पूरन डाबर का कहना हैं कि इससे विश्व के बाजार में चीन का उत्पाद सस्ता होगा और जूते के बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी।
चीन ने अपनी मुद्रा में दो प्रतिशत का अवमूल्यन किया है लेकिन रिटेल में यह पांच प्रतिशत बैठेगा। इसका असर भारत के जूता उद्योग पर भी पड़ेगा। हम विश्व बाजार में तेजी के साथ चीन का बाजार कब्जा कर रहे हैं, ऐसे में चीन का जूता सस्ता होने से वह बाजार में मजबूत होगा।
भारत भी करे मुद्रा में अवमूल्यन
इसके मुकाबला हम तभी कर पाएंगे जब भारत भी अपनी मुद्रा का अवमूल्यन करें।
आईआईए के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तरुण छेत्रपाल मानते हैं कि चीन के फैसले से
हमें अपना कारोबार बढ़ाने में मदद तो मिलेगी, लेकिन स्थानीय कारोबारी घाटे
में आ जाएंगे।
चीन के फैसले से मुजफ्फरनगर के स्टील उद्योग में और
मंदी के आसार बन गए है। टिहरी स्टील के मालिक एवं मुजफ्फरनगर रोलिंग मिल्स
एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सतीश गोयल का कहना है कि चीन ने अपना स्टील भारत
में भेज कर यहां के स्टील उद्योग की कमर तोड़ दी।
अब युआन में दो फीसदी की
कमी से डॉलर और मजबूत होगा। इससे चीन के उत्पादों में और मंदी आएगी, ऐसे
में स्टील और लोहा और मंदा होगा।
घरेलू उद्यमियों को होगा नुकसान
इसका भारत में और अधिक आयात होने से
मुजफ्फरनगर का इस्पात उद्योग और मंदी में चला जाएगा। ऐसे में मुजफ्फरनगर के
इस्पात उद्योग से जुड़े 60 हजार लोगों के सामने संकट खड़ा हो सकता है।
छोटे
पुर्जे बनाने वाली इंडस्ट्री भी इससे प्रभावित होगी। फेडरेशन ऑफ एक्सपोर्ट
आर्गेनाइजेशन के प्रेजीडेंट एस सी रल्हन का कहना है कि पिछले आठ माह से
निर्यात में लगातार गिरावट है।
सरकार को एक्सपोर्ट फ्रेंडली नीतियां बनाकर
उद्यमियों को पैकेज देना होगा, जिसके लिए शीघ्र ही निर्यातकों का
प्रतिनिधिमंडल सरकार से बातचीत भी करेगा।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट के
कोआर्डिनेटर आलोक श्रीवास्तव मानते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को
इससे काफी नुकसान होगा।छोटे पुर्जे सस्ते हो जाएंगे और उनका आयात अधिक
होने लगेगा जिसका नुकसान घरेलू उद्यमियों को होगा।