नॉन वेज (मांसाहारी) फूड की पहचान जल्द ही बदल सकती है। सरकार ने वेज और नॉन वेज फूड प्रोडक्ट की पहचान को आसान बनाने के लिए फूड सेफ्टी नियमों में बदलाव की कवायद शुरू कर दी है।
नॉन वेज फूड को भूरे तिकोने का प्रतीक देने की तैयार चल रही है जबकि शाकाहारी फूड हरे चौकोर के अंदर हरे गोले से ही पहचाने जाएंगे।
शाकाहारी और मांसाहारी खाने की पहचान के मुद्दे पर सरकार उद्योग जगत से विचार विमर्श के बाद नए मानकों को अंतिम रूप देने में जुटी है। इसके लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएएआई) ने नए फूड लेबलिंग रेगुलेशन का मसौदा तैयार किया है।
नॉन-वेज फूड प्रोडक्ट्स के लिए भूरे तिकोने के अंदर इसी रंग के गोले का चिह्न दिया गया है। नॉन वेज खाने के पैकेट की पहचान आसानी से हो, इसके लिए भूरे तिकोने के अंदर गोले का आकार 3 मिलीमीटर से कम नहीं हो सकता। जबकि पैकेट के आकार के साथ नॉन-वेज के चिह्न का आकार भी बढ़ता जाएगा।
अभी तक वेज और नॉन-वेज खाने के पैकेट की पहचान लाल और हरे रंगे के चाकोर के अंदर गोल चिह्न से होती है। लेकिन देश में कलर ब्लाइंड लोगों की बड़ी आबादी को देखते हुए इनका आकार बदला जा रहा है। इस ड्राफ्ट रेगुलेशन को जल्द ही सरकार की मंजूरी मिल सकती है।
इन नियमों को लागू करने के लिए फूड इंडस्ट्री को नई पैकिंग पर खर्च करना होगा। इसे देखते हुए उद्योग जगत इन नियमों को लागू करने के लिए कुछ समय दिए जाने की मांग कर रही है। आयायित फूड प्रोडक्ट की लेबलिंग के नए नियमों को सरकार एक जुलाई, 2014 तक लागू करने की छूट दे चुकी है।
विज्ञापन में भी दिखाना होगा नॉन-वेज का लोगो
ड्राफ्ट रेगुलेशन के मुताबिक, फूड प्रोडक्ट के विज्ञापनों में भी वेज या नॉन-वेज का लोगो साफ तौर पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा फूड पैक पर यह लोगो ब्रांड और उत्पाद के नाम के साथ स्पष्ट तौर पर प्रदर्शित करना होगा।
अलग से देनी है अंडे की जानकारी
जिन खाद्य उत्पादों में अंडे के अलावा कोई अन्य नॉन-वेज तत्व नहीं है, उनकी जानकारी भी पैकेट पर अलग से देने का सुझाव दिया गया है। गौरतलब है कि अलग-अलग देशों में अंडे को लेकर नजरिए में अंतर है। खासतौर पर कुकीज, केक और बिस्कुट के अंडे से बने होने की जानकारी पैक पर होनी चाहिए।