केंद्रीय खाद्य मंत्री केवी थॉमस ने कहा कि खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने की अभी कोई योजना नहीं है। हालांकि, उद्योग जगत ने चिंता जताई है कि वनस्पति तेलों के सस्ते आयात से तिलहन किसान प्रभावित हो रहे हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक है और कच्चे तेल पर कोई आयात शुल्क नहीं लगाता, जबकि रिफाइंड तेल पर 7.5 फीसदी शुल्क वसूला जाता है।
पिछले सप्ताह उद्योग संगठन साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने वित्त, वाणिज्य और खाद्य मंत्रालयों के सामने अपना पक्ष रखकर रिफाइंड वनस्पति तेल पर आयात शुल्क बढ़ाकर 20 फीसदी करने और कच्चे तेल पर 10 फीसदी आयात शुल्क लगाने की मांग की थी।
आयात शुल्क का ढांचा बदलने की योजना को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में थॉमस ने कहा कि फिलहाल उनके पास खाद्य तेल पर आयात शुल्क बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इससे पहले, एसईए ने कहा था कि कम कीमतों पर वनस्पति तेल का आयात करने से घरेलू तिलहन की कीमतें प्रभावित होंगी। मसलन, बुवाई सीजन में 4,800 रुपये प्रति क्विंटल पर रही सोयाबीन की कीमतें से अब कटाई के दौरान घटकर 3,300 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई हैं। ऐसे में अब किसान कीमतों को लेकर चिंतित हैं।
एसईए का कहना है कि खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने का असर अधिकांश उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा। न ही इसके चलते महंगाई दर प्रभावित होगी, क्योंकि पिछले छह माह के मुकाबले वर्तमान में कीमतें करीब 15 फीसदी कम हैं। आयात शुल्क में बढ़ोतरी से सरकार को करीब 4,000-5,000 करोड़ रुपये का राजस्व भी प्राप्त होगा। वित्तवर्ष 2011-12 के दौरान देश में रिकॉर्ड कुल 1 करोड़ टन वनस्पति तेल का आयात किया गया।